सामना संवाददाता / मुंबई
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उठी आवाज मुंबई तक पहुंची। शनिवार को अगस्त क्रांति मैदान में सीजेपी के समर्थन में जुटे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका। कई लोगों को घसीटकर पुलिस वाहनों में बैठाया गया। पुलिस ने बताया कि मुंबई के अलग-अलग इलाकों से करीब ६०० लोगों को हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया।
तुषार गांधी को बांद्रा से हिरासत में लेकर डी.एन. नगर पुलिस थाने ले जाया गया। उन्हें करीब नौ घंटे बाद छोड़ा गया। रविवार को उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि हिरासत और दबाव के बावजूद संघर्ष जारी रहेगा। उनका कहना था कि यह लड़ाई संस्थाओं को आम नागरिकों के हित में काम करने लायक बनाने के लिए है। पुलिस का कहना है कि अगस्त क्रांति मैदान अधिकृत प्रदर्शन स्थल नहीं है और आयोजन की अनुमति नहीं ली गई थी। लेकिन सवाल यह है कि जब प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक जुटे थे, तो इतनी बड़ी संख्या में हिरासत और घसीटकर बसों में बैठाने की जरूरत क्यों पड़ी? गांधी मैदान से उठा नागरिक प्रतिरोध का इतिहास ऐसे दृश्य को और तीखा बना देता है। हिरासतें लोगों की आवाज रोक पाएंगी या आंदोलन को और फैलाएंगी, यह अब सरकार की कार्रवाई तय करेगी।
