मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से घबराई व्यवस्था!

दिल्ली लाइव : चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से घबराई व्यवस्था!

अरुण कुमार गुप्ता
राजधानी दिल्ली में विरोध की आवाज अब सिर्फ मांगों को लेकर नहीं, बल्कि विरोध करने की जगह को लेकर भी संघर्ष कर रही है। जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद छात्र और युवा संगठनों ने इसका विरोध तेज कर दिया है। कल स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमाक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ताओं ने फिरोजशाह रोड से जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाला। उनकी मांग थी कि जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। दिल्ली पुलिस ने ११ अक्टूबर के आदेश के तहत जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को नए विकल्पों के रूप में नामित किया। पुलिस का कहना है कि यह कदम वैकल्पिक स्थलों की समीक्षा के बाद उठाया गया। लेकिन विरोध करने वाले संगठनों का सवाल है कि क्या नए स्थान नागरिकों की आवाज को उतने ही प्रभावी तरीके से सत्ता और प्रशासन तक पहुंचा पाएंगे? खासकर बुराड़ी और पूर्वी दिल्ली के मैदानों की दूरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची से जुड़े विवादों को उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शन की जगह बदली, विरोध नहीं!
प्रदर्शन की जगह बदली जा सकती है, लेकिन विरोध की आवाज को वैâसे रोका जाएगा? दिल्ली में जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के पैâसले ने लोकतंत्र, असहमति और नागरिक अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है। सत्ता के दरवाजे तक अपनी शिकायत पहुंचाने वाले प्रदर्शनकारियों के सामने अब सवाल है कि क्या उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए संसद और राजनीतिक केंद्रों से दूर जाना पड़ेगा? जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां धरना देने का मतलब केवल सड़क पर बैठना नहीं, बल्कि सत्ता का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचना भी है। ऐसे में इस स्थल को प्रदर्शन के अधिकृत स्थलों की सूची से हटाने के पैâसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दिल्ली पुलिस के आदेश के बाद रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों के रूप में सामने लाया गया है। प्रशासन के सामने यातायात, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। लेकिन प्रदर्शनकारियों की चिंता यह है कि दूर स्थित स्थलों पर पहुंचने, भीड़ जुटाने और अपनी मांगों को मीडिया तथा जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने में अतिरिक्त मुश्किलें आ सकती हैं। सवाल यह भी है कि क्या नए स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति समय पर और पारदर्शी तरीके से मिलेगी? यदि किसी संगठन को बार-बार अनुमति के लिए भटकना पड़े, तो शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार व्यवहार में कितना प्रभावी रह जाएगा?

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