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महायुति राज में व्यापारी बेहाल!.. कारोबार करें या रंगदारी भरें?

– पिस्तौल दिखाकर धमकी, फर्जी दस्तावेजों के सहारे वसूली का आरोप
– मुंबई से पालघर तक रंगदारी का शिकंजा, सुरक्षा के दावों की खुली पोल
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार के राज में व्यापारी बेखौफ होकर कारोबार नहीं कर पा रहे हैं। मुंबई और आसपास के इलाकों में सामने आ रहे रंगदारी के मामले कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहीं पिस्तौल दिखाकर लाखों रुपए मांगे जा रहे हैं, तो कहीं गैंगस्टर के नाम पर करोड़ों की वसूली का दबाव बनाया जा रहा है। ताजा मामला पालघर जिले के वाडा का है। पत्थर खदान का कारोबार करने वाले कारोबारी से ८० लाख रुपए की रंगदारी मांगी गई। आरोप है कि कारोबार शुरू करने देने के नाम पर पहले ४० लाख रुपए लिए गए। बाद में फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव और अनापत्ति प्रमाणपत्र का मामला सामने आने पर कारोबारी को पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। मुंबई क्राइम ब्रांच ने अंधेरी-पश्चिम के एक रेस्तरां में ३० लाख रुपए की वसूली के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। हफ्ता वसूली की यह कोई अकेली घटना नहीं है। सितंबर २०२६ में मुंबई में आयकर और क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर एक कारोबारी से एक करोड़ रुपए वसूलने की साजिश का पर्दाफाश हुआ। इसी महीने बांद्रा के एक डेवलपर से गैंगस्टर छोटा राजन के नाम पर ११ करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने के मामले में भी पांच गिरफ्तारियां हुईं।
इन घटनाओं के बीच महायुति सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। पुलिस का खौफ अपराधियों में खत्म होता जा रहा है। कारोबारियों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की है, प्रशासन और पुलिस मानो हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
डर के साये में कारोबार!
मुंबई से पालघर तक रंगदारी के मामलों ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं पिस्तौल दिखाकर धमकियां, तो कहीं गैंगस्टर के नाम पर करोड़ों की मांग। सवाल है कि कारोबारियों को भयमुक्त माहौल देने के महायुति सरकार के दावे जमीन पर कितने कारगर हैं?

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