अनिल तिवारी
नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के बीच देश की सड़कों पर नारी शक्ति का प्रतिरोध तेज होता जा रहा है। कहीं छात्राएं बर्बर पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शन में लौट रही हैं, तो कहीं महिला जनप्रतिनिधि प्रशासन की पाबंदियों पर सवाल उठा रही हैं। ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के खिलाफ उठती इन आवाजों का संदेश स्पष्ट है; वोट जनता का अधिकार है, सत्ता की जागीर नहीं!
मां दुर्गा से माता काली तक देवी के स्वरूप अन्याय के प्रतिकार और साहस के प्रतीक हैं। उसी प्रतीक की झलक इन महिलाओं के लोकतांत्रिक संघर्ष में देखी जा सकती है। इनके हथियार हैं सवाल, संगठन, सत्याग्रह और संवैधानिक जवाबदेही। इन महिलाओं की चुनौती आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कराने की है। नवरात्रि का संदेश भी यही साहस देता है; अन्याय कितना ही ताकतवर क्यों न हो, उसका डटकर सामना किया जाना चाहिए!
नवरात्रि में नारी पर वार, सत्ता से जवाब मांगेगा प्रतिकार!
एक ओर मां दुर्गा की आराधना, दूसरी ओर अधिकार मांगती महिलाओं पर कथित अत्याचार! प्रदर्शनकारी छात्राओं के साथ पुलिस की मारपीट के आरोपों ने मोदी सरकार के सामने तीखा सवाल खड़ा किया है; नारी शक्ति का सम्मान केवल भाषणों में होगा या सड़कों पर भी?
देवी के जयकारों के बीच नारी की आवाज अनसुनी क्यों?
आंदोलन समर्थकों के लिए नवरात्रि से काली पूजा तक का समय अन्याय के प्रतिकार का प्रतीक बन रहा है। कुछ समर्थक ८ नवंबर की काली पूजा तक सत्ता के अहंकार के निर्णायक पराभव की उम्मीद जता रहे हैं। मां दुर्गा और काली में आस्था रखने वाली इन आवाजों का विश्वास है कि अन्याय स्थायी नहीं होता। लोकतंत्र में इस विश्वास की परीक्षा धरने, जनजागरण, निष्पक्ष जांच और जनता के पैâसले से होगी। वोट चोरी पर उठे सवालों और महिलाओं से दुर्व्यवहार के आरोपों का जवाब सरकार को देना होगा। देवी के जयकारों के बीच महिलाओं की आवाज अनसुनी कैसे की जा सकती है?
छात्राओं का साहस, सत्ता से सवाल
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा, सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह प्रदर्शन और छात्र लामबंदी में सक्रिय हैं। अंजलि भारद्वाज नागरिक प्रतिवाद में शामिल हुर्इं। हालिया प्रेस वार्ता में ऋतु बराला ने कथित पुलिस मारपीट का विवरण देते हुए अगले प्रदर्शन में फिर आने का संकल्प सुनाया। केरल की छात्रा अथिरा ने भी हिरासत में मारपीट का आरोप सामने रखा।
बैरिकेड से बस्तियों तक मोर्चा
इस संघर्ष की पिछली कड़ियों में महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, सागरिका घोष, संजना जाटव और ज्योतिमणि की अगस्त २०२५ के दिल्ली मार्च में बैरिकेड पर चढ़कर विरोध की तस्वीरें दर्ज हैं। महाराष्ट्र में वर्षा गायकवाड चैत्यभूमि के सत्याग्रह में उतरीं, जबकि जीनत शबरीन ने मुंबई की मेट्रो और लोकल में जनसंपर्क किया। उत्तर प्रदेश में रूही अंजुम, रीना शर्मा और अर्चना कटारिया स्थानीय प्रदर्शनों में सामने आर्इं। कर्नाटक में सौम्या रेड्डी ने शिकायत का रास्ता अपनाया।
देवी की पूजा, बेटी के मां-बाप को थाना!
नवरात्रि में देवी के जयकारे और न्याय मांगते बेटी के मां-बाप को पुलिस थाने के चक्कर! अंकिता भंडारी के माता-पिता को इंडिया गेट के पास धरने से हिरासत में लेना सत्ता की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल है। जिस दुष्यंत गौतम की भूमिका की जांच की मांग परिवार कर रहा है, उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने से परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया है। अंकिता की मां सोनी देवी ने नियुक्ति वापस होने तक भूख हड़ताल की चेतावनी दी है। परिवार की मांग है कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकी जाए। गौतम ने आरोपों से इनकार किया है; उन्हें इस मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। लेकिन सरकार से राजनीतिक और नैतिक सवाल अपनी जगह कायम है; क्या पीड़ित परिवार का विश्वास जीतने का यही तरीका है? नारी सम्मान के भाषण देने वाली सत्ता एक मां की गुहार सुनने से क्यों कतरा रही है? देवी की आराधना का अर्थ अन्याय के सामने खड़ी नारी का सम्मान भी है। न्याय मांगते माता-पिता को हिरासत और उनके सवालों पर खामोशी; ऐसा व्यवहार सत्ता के नैतिक पतन की चेतावनी है। जनाक्रोश को पुलिस कार्रवाई से हटाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता!
देवी का वंदन, नारी का दमन!
भाजपा खुद को सनातन संस्कृति की संवाहक बताने का कोई अवसर नहीं छोड़ती। उसी संस्कृति की, जिसमें नारी को शक्ति स्वरूपा माना जाता है। इस समय तो नवरात्र का पर्व है; मां दुर्गा की आराधना और नारी शक्ति के वंदन का पर्व। ऐसे में अधिकार मांगती छात्राओं के साथ कथित मारपीट और न्याय मांगती मां को पुलिस हिरासत में लेने की घटनाएं सामने आएं, तो सत्ता के आचरण और उसके सांस्कृतिक दावों के बीच की खाई वैâसे छिपेगी?
मंचों से मातृशक्ति का जयघोष और सड़कों पर उसी शक्ति की आवाज दबाने के प्रयास! सरकार को बताना होगा कि उसके लिए नारी सम्मान का अर्थ क्या है। क्या सम्मान केवल उस महिला का होगा जो चुप रहे, सवाल उठाने वाली का नहीं?
इसी विरोधाभास पर उक्ति याद आती है; ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि।’ मां दुर्गा अन्याय के प्रतिकार की प्रतीक हैं। उनकी आराधना करते हुए अन्याय के विरुद्ध खड़ी महिलाओं का अपमान करना, आराधना के मूल संदेश को ही ठुकराना है। माता के प्रकोप की आस्थागत चेतावनी का लोकतांत्रिक अर्थ भी स्पष्ट है; नारी की पीड़ा से मुंह मोड़ने वाली सत्ता को उसके सवालों और जनता के पैâसले का सामना करना पड़ता है।
छात्राओं से बर्बरता पर राहुल गांधी का हमला
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने `एक्स’ पर पोस्ट कर छात्राओं और महिलाओं के साथ दिल्ली पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने यौन उत्पीड़न और निजी अंगों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने पर बर्बरता की गई। उन्होंने कहा, ‘यह सब आवाजों को दबाने की साजिश का हिस्सा है।’
दिल्ली पुलिस के खिलाफ सड़क पर उतरीं महिलाएं!
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने दिल्ली में आंदोलन किया था। हालांकि, इस आंदोलन में शामिल युवक-युवतियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को दिल्ली में महिला संगठनों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने ‘एसआईआर रद्द करो’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’, ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ और ‘दिल्ली पुलिस की अमानवीय मारपीट का निषेध’ जैसे नारे लगाए।
