मुख्यपृष्ठनए समाचारदेश-दुनिया में मोदी सरकार की फजीहत!

देश-दुनिया में मोदी सरकार की फजीहत!

-महिलाओं पर कथित अत्याचार और आंदोलन पर कार्रवाई का विरोध
-पत्रकार संगठनों ने मांगी जवाबदेही; अमेरिकी सांसदों तक पहुंची शिकायत
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
दिल्ली के आंदोलनों में महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार तथा प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर मोदी सरकार की कार्यशैली पर देश से विदेश तक सवाल उठ रहे हैं। महिला संगठनों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया है, जबकि पत्रकार संगठनों ने स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शनिवार को भारतीय महिला राष्ट्रीय फेडरेशनल और अन्य महिला तथा छात्र संगठनों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च किया। संगठनों ने आरोप लगाया कि महिलाओं और लैंगिक अल्पसंख्यक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का उद्देश्य उन्हें राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी से डराना है। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई मांगी। नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया, इंडिया ने पत्रकारों से मारपीट और मनमानी हिरासत की निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। संगठन का आरोप है कि पेशेवर पहचान बताने के बावजूद पत्रकारों को काम करने से रोका गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी तीन महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न पर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांग चुका है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छह अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो से भारत यात्रा में प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का मुद्दा उठाने का आग्रह किया है। इन प्रतिक्रियाओं ने पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही पर दबाव बढ़ाया है। संबंधित अत्याचार के आरोपों की जांच और जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है।
छात्रों और युवाओं में गुस्से का उबाल!
नई दिल्ली। रोजगार का इंतजार, परीक्षाओं में गड़बड़ी और मतदाता सूची को लेकर अविश्वास; छात्रों और युवाओं की नाराजगी अब सड़कों पर दिखाई दे रही है। दिल्ली में जारी प्रदर्शनों ने सरकार के सामने सवाल खड़ा किया है कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में वर्षों लगाने वाली पीढ़ी के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? रॉयटर्स की पड़ताल के अनुसार, युवा असंतोष केवल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है। बेरोजगारी, प्रश्नपत्र लीक और अवसरों की अनिश्चितता भी आंदोलन को ऊर्जा दे रही है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने शिकायत की है कि आर्थिक विकास के बड़े दावों के बावजूद उनके जीवन में सुरक्षित रोजगार की उम्मीद पूरी नहीं हुई है। इसी पृष्ठभूमि में अभिजीत दीपके और नेहा बोरा सहित आंदोलनकारियों की हिरासत तथा प्रदर्शन स्थलों पर पाबंदियों ने विरोध को नया मुद्दा दिया है। छात्र समूह सवाल उठा रहे हैं कि उनकी शिकायतें सुनने के बजाय उन्हें जुटने से क्यों रोका जा रहा है? मोबाइल वीडियो और डिजिटल मंचों ने आंदोलन की आवाज को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाया है। विपक्षी दल भी मांगों के समर्थन में सक्रिय हुए हैं।

अन्य समाचार