मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स : शक्ति प्रदर्शन पर पुलिस का शिकंजा!

पटना की पॉलिटिक्स : शक्ति प्रदर्शन पर पुलिस का शिकंजा!

-अरुण कुमार गुप्ता

बिहार में विधान परिषद चुनाव की सरगर्मी के बीच मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह का रोड शो अब पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक विवाद, दोनों के केंद्र में आ गया है। जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में निकाले गए रोड शो को लेकर तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस के मुताबिक, निर्धारित अनुमति से अधिक वाहनों के इस्तेमाल, गाड़ियों में सायरन बजाने और जेसीबी मशीनों से फूल बरसाने के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप हैं। पटना जिले के मोकामा क्षेत्र में निकले रोड शो में बड़ी संख्या में वाहन शामिल हुए। रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ थाने में दो और मोकामा थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई।मामलों में अनंत सिंह के अलावा जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह और आयोजक कर्मवीर सिंह के नाम भी शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई का आधार कथित तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और यातायात एवं विधि-व्यवस्था में बाधा है।इस मामले का राजनीतिक पहलू भी कम अहम नहीं है। अनंत सिंह जदयू के विधायक हैं, लेकिन पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव में वे जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं।
चुनाव आयोग पर प्रशांत किशोर का तीखा वार!
बिहार की राजनीति में चुनाव आयोग की भूमिका एक बार फिर बहस के केंद्र में है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर २३ अक्टूबर, शुक्रवार को होने वाले मतदान की तारीख पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शुक्रवार को मतदान कराने के फैसले से अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की भागीदारी प्रभावित हो सकती है।किशोर ने इस फैसले को लेकर आयोग की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। किशोर ने जमुई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि शुक्रवार को मतदान कराने से मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी कम हो सकती है।उन्होंने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी पहले सवाल उठाए हैं।प्रशांत किशोर का सवाल केवल मतदान की तारीख तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी भी समुदाय के मतदाता को मतदान करने में व्यावहारिक कठिनाई न हो। शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज के लिए जुटते हैं, इसलिए मतदान के समय और तारीख के असर पर चर्चा जरूरी है। यही वह बिंदु है जहां चुनाव आयोग की जिम्मेदारी अहम हो जाती है। मतदान की तारीख तय करने के प्रशासनिक आधार, संबंधित पक्षों से परामर्श और मतदाताओं की सुविधा से जुड़े सवालों पर आयोग की ओर से स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।
संजय झा की चेतावनी भी बेअसर!
बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक बहस में ला दिया है। मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। उन्होंने यहां तक कहा कि वह नीरज कुमार की जमानत जब्त कराने की कोशिश करेंगे। दूसरी ओर, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय झा ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दी गई है।विवाद की जड़ पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव है। जदयू ने इस सीट से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज ने डॉ. अनुज सिंह को मैदान में उतारा है। अनंत सिंह खुले तौर पर अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। इतना ही नहीं, वह अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार भी कर चुके हैं।

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