सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर क्षेत्र के अंतर्गत काशीमीरा के चेना-बेलकरी पाड़ा जंगल संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में हुई गोलीबारी के मामले मे एक खौफनाक सच सामने आया है। जंगलों में अवैध शिकार के दौरान एक ६० वर्षीय बुजुर्ग की बंदूक की गोली लगने से मौत हो गई थी। मामले को छिपाने के लिए एक डॉक्टर ने व्हॉट्सऐप वीडियो कॉल पर शव देखकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया, जिसके आधार पर परिजनों ने बिना पुलिस को बताए शव का अंतिम संस्कार कर दिया। काशीगांव पुलिस ने इस चौंकाने वाले मामले का भंडाफोड़ करते हुए डॉक्टर सहित सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना २० अक्टूबर २०२६ को तब सामने आई जब सहायक पुलिस निरीक्षक सुहास कांबले को मुखबिर से सूचना मिली कि चेनागांव निवासी विजय सापटे की जंगल में गोली लगने से मौत हो गई है और उनका शव गुपचुप तरीके से श्मशान भूमि में जला दिया गया है। पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राहुल पाटील के नेतृत्व में तुरंत जांच शुरू की और मृतक के बेटे रोहित सापटे व अन्य से पूछताछ की। जानकारी मिली कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के चेनागांव जंगल में कुल ७ लोग जंगली जानवरों का शिकार करने गए थे। रात करीब ९ बजे आरोपी महेश गायकर को सामने मोबाइल की लाइट दिखी। उसने समझा कि जानवर की आंखें चमक रही हैं और गोली चला दी। गोली विजय सापटे के सीने में लगी, जिससे उनकी मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए। मामले को रफा-दफा करने के लिए आशीष हॉस्पिटल के डॉ. राजेश पालांडे ने व्हॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए शव देखकर मौत का फर्जी कागजात दे दिया। इसके बाद मृतक के बेटे व साथियों ने चेनागांव श्मशान घाट में शव जलाकर सबूत मिटा दिए।
काशीगांव पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी महेश गायकर, मृतक के बेटे रोहित सापटे, कल्पेश डगला, कुणाल शेलार, काठोड लाबड, प्रवीण जाधव और डॉ. राजेश पालांडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा १०६(१), २३८ और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने महेश गायकर और काठोड लाबड को गिरफ्तार कर लिया है। आगे की जांच जारी है।
