सामना संवाददाता / बीड
दशहरा के अवसर पर मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे द्वारा महाराष्ट्र राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर फेंके गए ५०० करोड़ रुपए के `बम’ से शिंदे गुट के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में सनसनी पैâल गई है। एक बार फिर जरांगे ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा है कि आप यह बताएं कि आपने मेरे नाम पर भाजपा से पैसे लिए हैं या नहीं? साथ ही, उन्होंने गुरुवार को प्रेस कॉन्प्रâेंस कर इस संबंध में सबूत देने की घोषणा करते हुए शिंदे के इर्द-गिर्द शिकंजा कस लिया है।
शिंदे की मौजूदगी में हम पर चिल्लाने और `बाप दिखाने’ की भाषा बोलने वाले नेता आज भले ही कितना भी हंगामा कर लें, लेकिन सुबह ११ बजे भाजपा के भीतर की वह सारी चर्चा सबूतों के साथ महाराष्ट्र के सामने रखूंगा, ऐसा मनोज जरांगे ने स्पष्ट किया है। इस ५०० करोड़ रुपए के पूरे षड्यंत्र में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम शामिल हैं, जिनमें बेहद शुद्ध मराठी और हिंदी बोलने वाले बड़े नेता भी शामिल हैं। किसकी असली औकात क्या है और असली गद्दार कौन है, यह महाराष्ट्र की जनता को साफ दिखाई देगा, ऐसा जोरदार पलटवार जरांगे ने शिंदे गुट के नेताओं की तरफ से हो रही आलोचना पर किया है। यदि शिंदे ने भाजपा के केंद्रीय और राज्य के नेताओं को नहीं बताया होता, तो भाजपा के आंतरिक हलकों में यह चर्चा कैसे चलती?
`मुझे खत्म करने का षड्यंत्र’
`मैं किसी भी राजनीतिक मोर्चे या पार्टी के इशारे पर काम नहीं करता। इस कथित आर्थिक लेन-देन के पीछे बहुत बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र है। मुझे खत्म करने और मराठों के आंदोलन को कुचलने के लिए यह साजिश रची गई। मैं मराठा समाज के सामने यह सब रखूंगा; उसके बाद दिल्ली के कौन और महाराष्ट्र के कौन हैं, यह आप खुद ढूंढ़ लीजिए, ऐसा जरांगे ने कहा। हालांकि, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने ५०० करोड़ रुपए न तो किसी को दिए हैं और न ही किसी से लिए हैं।
