कविता श्रीवास्तव
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में प्रसिद्ध पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के साथ हुई घटना ने कला, कलाकारों के सम्मान और जनप्रतिनिधियों के आचरण पर चर्चा उठाई है। एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में मशहूर गायक दलेर मेहंदी प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान उत्तराखंड के एक मंत्रीजी मंच पर पहुंचे और गायक पर शराब पीकर कार्यक्रम में आने का आरोप लगाया। मंत्री ने उनकी गायकी और प्रस्तुति पर आपत्ति उठाई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मंत्री का कहना था कि कलाकार को आमंत्रित करने पर काफी खर्च किया गया था और दर्शकों को बेहतर प्रस्तुति की अपेक्षा थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उन्हें कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए था। यह बात ठीक है क्योंकि आमंत्रित कलाकार से अच्छी प्रस्तुति की अपेक्षा रहती है। इस अपेक्षा के पूरा न होने पर नाराजगी तो लाजिमी है। लेकिन कलाकार के नशे में होने का आरोप लगाने के प्रमाण भी होने चाहिए। वीडियो में दलेर मेहंदी असहज और अस्वस्थ दिखाई देते हैं। हालांकि, केवल उनके हाव-भाव के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उन्होंने शराब पी थी। इस घटना के बाद दलेर मेहंदी के भाई और गायक मीका सिंह ने कहा कि दलेर पिछले दो वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और हाल ही में उनकी बड़ी सर्जरी हुई थी। मीका ने शराब पीने के आरोपों को खारिज किया है। अभिनेता अनुपम खेर ने भी दलेर मेहंदी के समर्थन में बयान दिया है। इस घटना के बाद मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने दलेर मेहंदी के समर्थन में आवाज उठाई है। दलेर की सर्जरी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का उल्लेख करते हुए संवेदनशीलता बरतने की अपील की। हालांकि वायरल वीडियो में दलेर मेहंदी ने मंत्री के हस्तक्षेप के दौरान संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने लोगों से मंत्री के निर्देशों के अनुरूप चलने को कहा। उनकी यह प्रतिक्रिया को विवाद बढ़ाने के बजाय स्थिति संभालने की कोशिश रही। इस घटना के बाद कई लोगों ने कहा कि यदि किसी कलाकार की प्रस्तुति अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है, तो आयोजक उनसे स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। कार्यक्रम रोकने या अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने का भी रास्ता खुला है। लेकिन सार्वजानिक तौर पर गंभीर आरोप लगाना अनुचित है। मंत्री जैसे जिम्मेदार व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वे असहमति व्यक्त करते समय भी संयम बनाए रखें। हां, कलाकारों को भी दर्शकों के समय, आयोजकों के खर्च और कार्यक्रम की गरिमा का सम्मान बनाए रखना चाहिए। यदि कोई अस्वस्थ है, तो उसके साथ मानवीय संवेदना भी आवश्यक है। लेकिन किसी नामी कलाकार को बुलाकर इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना ठीक नहीं है। उचित होता कि पहले ही कलाकार की स्थिति की जानकारी ली जाती। उनकी प्रस्तुति के बदलेे अन्य विकल्प पर विचार होता।
