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दिल्ली लाइव :  वोटर लिस्ट पर बवाल, चुनाव आयुक्त पर इस्तीफे का दबाव!

अरुण कुमार गुप्ता

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देश की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा विपक्ष अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया और आयोग के तकनीकी पोर्टल तक पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष की शिकायतें सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ईसीआईनेट पोर्टल की व्यवस्था मतदाता सूची से जुड़े पैâसलों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पोर्टल में पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के लिए मतदाता प्रपत्रों और नोटिस-सुनवाई संबंधी डैशबोर्ड तक पहुंच को सीमित करने वाली सुविधा मौजूद है। कांग्रेस ने इन आरोपों के आधार पर चुनाव आयोग में व्यापक सुधार और उसके आईटी विभाग की समीक्षा की मांग की है। विपक्षी दलों ने एसआईआर की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कथित एकतरफा पैâसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। अदालत ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित करने से जुड़े विवाद पर भी सुनवाई करने की बात कही। सुनवाई में प्रदर्शन के जरिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने के आरोपों पर भी अदालत ने सवाल उठाए थे।
रावण कम पड़ा तो कॉकरोच जला दिया!
दशहरे के मंच पर सियासत का नया तमाशा
दिल्ली के पीतमपुरा में दशहरे पर ३० फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला जलाए जाने से राजधानी का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाने वाले दशहरे में कॉकरोच की एंट्री ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि मामला पुतला दहन से निकलकर पुलिस शिकायत और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया। आम आदमी पार्टी ने इस आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शिकायत देकर भाजपा नेताओं और आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। ‘आप’ का आरोप है कि धार्मिक आयोजन को राजनीतिक संदेश देने का मंच बनाया गया। पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर कॉकरोच के पुतले को जलाने के पीछे मंशा क्या थी और इस प्रतीक के जरिए किसे निशाना बनाया जा रहा है। इस तरह एक पुतले ने दिल्ली की राजनीति में आरोपों की नई आग सुलगा दी। इस विवाद को कॉकरोच जनता पार्टी के संदर्भ से भी जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि यह संगठन कॉकरोच को अपने राजनीतिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। अब सवाल सीधा है कि दशहरे पर रावण के साथ कॉकरोच जलाना महज एक अनोखा आयोजन था या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी था? क्या त्योहारों के मंच अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता दिखाने का अखाड़ा बनते जा रहे हैं? दिल्ली पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के जवाब से ही विवाद की असल तस्वीर साफ होगी। फिलहाल, रावण तो जल गया, लेकिन
कॉकरोच ने दिल्ली की सियासत में आग लगा दी!

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