मुख्यपृष्ठस्तंभ‘कुछ तो बोलो सरकार...!'

‘कुछ तो बोलो सरकार…!’

संतोषी रावत

जब विदेशी मेहमान हिंदुस्थान की धरती पर आकर हमें ही ज्ञान बांटने लगता है
जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो हिंदुस्थान की यात्रा पर आते हैं और यहां की जमीन पर खड़े होकर यह बेबाक बयान देते हैं कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते क्यों बनाए रखने चाहिए, तो यह सिर्फ एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं रह जाती। यह उस मानसिकता को उजागर करता है जिसके तहत पश्चिमी देश आज भी दक्षिण एशिया को अपने रणनीतिक चश्मे से देखते हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही विदेशी हुक्मरान हिंदुस्थान की सरजमीं पर कदम रखते हैं, अचानक उन्हें यहां की वास्तविकताओं, क्षेत्रीय पेचीदगियों और भारत के कड़े तेवरों का अहसास होने लगता है।
इस पूरी घटना ने देश की राजनीतिक और कूटनीतिक बहस को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है और हर देशवासी के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है, ‘कुछ तो बोलो सरकार…!’
आखिर क्या वजह है कि अमेरिकी विदेश मंत्री भारत आकर यह सफाई देते हैं कि पाकिस्तान से संबंध तोड़ना अमेरिका के लिए क्यों मुमकिन नहीं है? क्या यह हिंदुस्थान की सुरक्षा चिंताओं, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज करने की एक कोशिश है? रूबियो का यह तर्क कि पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है और उससे संवाद बनाए रखना जरूरी है, अमेरिकी लाचारी को तो बयां करता ही है, साथ ही यह भी दिखाता है कि वैश्विक महाशक्तियां आज भी अपनी सुविधानुसार आतंकवाद के मसले पर दोहरा रुख अपनाती हैं।
लेकिन इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल हमारी अपनी सरकार की चुप्पी या रक्षात्मक रुख पर उठता है। जब कोई विदेशी मंत्री हमारी राजधानी में आकर हमारी संप्रभुता के सामने पाकिस्तान के साथ अपनी नजदीकियों का बचाव करे, तो देश यह उम्मीद करता है कि सरकार की तरफ से एक कड़ा, स्पष्ट और दो-टूक जवाब दिया जाए।
‘कुछ तो बोलो सरकार’ का यह स्वर आज केवल विपक्ष का नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का है, जो चाहता है कि हिंदुस्थान की विदेश नीति किसी भी बाहरी दबाव के आगे न झुके। हिंदुस्थान अब एक उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति है। ऐसे में, सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि भारत की कीमत पर पाकिस्तान के साथ संतुलन बनाने की किसी भी कूटनीतिक चाल को सहन नहीं किया जाएगा। आतंकवाद के खात्मे पर बिना किसी समझौते के, देश को अब सिर्फ कूटनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि ठोस और मुखर राजनीतिक इच्छाशक्ति की दरकार है।

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