मुख्यपृष्ठस्तंभपूर्वांचल पॉलिटिक्स :  पंचायत की बाजी से तय होगी विधानसभा की हवा?

पूर्वांचल पॉलिटिक्स :  पंचायत की बाजी से तय होगी विधानसभा की हवा?

हिमांशु राज

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अब गांवों की सरकार चुनने की कवायद नहीं, बल्कि २०२७ के विधानसभा मुकाबले से पहले राजनीतिक ताकत की परीक्षा बन सकते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन महीने में चुनाव कराने के निर्देश ने भाजपा और विपक्ष, दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। आदेश लागू होने पर जनवरी तक ग्रामीण जनादेश सामने आ सकता है।
इस चुनाव का सबसे बड़ा असर विधानसभा की गुटबाजी पर पड़ सकता है। पंचायतों में एक ही दल से जुड़े कई प्रभावशाली चेहरे आमने-सामने उतरते हैं। स्थानीय विधायक किसी एक के साथ खड़ा हुआ तो दूसरा खेमा नाराज हो सकता है। विधानसभा चुनाव में यही नाराजगी भितरघात, निष्क्रियता या विरोधी उम्मीदवार की मदद में बदल सकती है। इसलिए पंचायत की जीत भी किसी दल के लिए विधानसभा में नुकसान की भूमिका तैयार कर सकती है।
भाजपा के सामने चुनौती होगी कि वह पंचायत चुनाव को ग्रामीण पकड़ मजबूत करने का अवसर बनाए, लेकिन स्थानीय टकराव से अपना संगठन न बिखरने दे। अच्छा प्रदर्शन सरकार के पक्ष में माहौल बनाने में मदद करेगा; कमजोर नतीजों को विपक्ष ग्रामीण नाराजगी के प्रमाण की तरह पेश कर सकता है। हालांकि स्थानीय रिश्तों, उम्मीदवारों और जातीय समीकरणों से प्रभावित पंचायत परिणामों को विधानसभा का सीधा पूर्वानुमान मानना गलत होगा।
समाजवादी पार्टी के लिए यह अपने पीडीए समीकरण की जमीनी पहुंच परखने का मौका होगा। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को साझा समर्थन में बदलना जितना जरूरी होगा, स्थानीय दावेदारों को साथ रखना उतना ही कठिन। पंचायतों में सहयोगी सामाजिक समूहों की आपसी प्रतिस्पर्धा विधानसभा के गठजोड़ को असहज भी कर सकती है।
कांग्रेस और बसपा जैसे दलों के लिए मुकाबला स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का अवसर बन सकता है, लेकिन उन्हें भी संगठनात्मक एकजुटता और स्थानीय गुटों के बीच संतुलन साधना होगा। फिलहाल, विभिन्न दल विधानसभा से पहले अपना संगठन मजबूत करने में जुटे हैं।
प्रशासनिक दबाव वास्तविक है, लेकिन चुनाव की व्यवहार्यता तैयारियों से तय होगी, दलों की सुविधा से नहीं। सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी या नहीं, इसकी पुष्टि के बिना निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। असली राजनीतिक सवाल यही है कि क्या दल पंचायतों में पैदा होने वाली कड़वाहट को विधानसभा तक पहुंचने से रोक पाएंगे?

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