मुख्यपृष्ठअपराधएसआरएन अस्पताल में इलाज मांगने पर मरीज के तीमारदारों से मारपीट का...

एसआरएन अस्पताल में इलाज मांगने पर मरीज के तीमारदारों से मारपीट का आरोप…गला दबाने और जेवर-मोबाइल छीनने का दावा

 -25-30 डॉक्टरों पर कमरे में बंद कर पीटने का आरोप, पत्नी को भी पुलिस के सामने लात मारने की शिकायत
-सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल

राजेश सरकार / प्रयागराज

स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे एक मरीज के तीमारदारों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाकर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अल्लापुर निवासी सर्वेश शुक्ला की ओर से कोतवाली में दी गई तहरीर के मुताबिक, 22 अक्टूबर की शाम गंभीर हालत में एक व्यक्ति को लेकर अस्पताल पहुंचे सर्वेश और उनके ड्राइवर को इलाज की गुहार लगाने पर कथित तौर पर मारपीट का सामना करना पड़ा। आरोप है कि डॉक्टरों ने उन्हें कमरे में बंद कर पीटा, गला दबाकर जान लेने की कोशिश की और दो तोले की सोने की चेन व आईफोन-13 छीन लिया। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
इलाज से इनकार के बाद बढ़ा विवाद, कमरे में बंद कर पीटने का आरोप
तहरीर के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 की शाम करीब सात बजे सर्वेश शुक्ला अपने ड्राइवर कृष्ण कुमार केसरवानी के साथ नरबहादुर नामक व्यक्ति को इलाज के लिए एसआरएन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल के गार्ड ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर के अंदर स्थित कक्ष संख्या 2/40 में जाने को कहा। सर्वेश का आरोप है कि वहां मौजूद मास्क और चश्मा लगाए एक डॉक्टर ने उनके ड्राइवर के बार-बार अनुरोध के बावजूद मरीज का इलाज करने से इनकार कर दिया। मरीज की गंभीर हालत का हवाला देने पर कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर पहले 10-15 डॉक्टर पहुंचे और फिर करीब 15 अन्य लोग भी आ गए। सर्वेश का दावा है कि उन्हें और उनके ड्राइवर को घसीटकर दूसरे कमरे में ले जाया गया, जहां दरवाजा बंद कर दिया गया। तहरीर में कुल 25-30 डॉक्टरों के हमले में शामिल होने का आरोप लगाया गया है, जिनमें दो महिला डॉक्टर भी शामिल बताई गई हैं।
गला दबाने,
बंधक बनाने और कीमती सामान छीनने का दावा
सर्वेश के मुताबिक, कमरे में उनके और ड्राइवर के साथ लाठी-डंडों तथा लोहे की रॉड से मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान उनके गले से दो तोले की सोने की चेन और आईफोन-13 छीन लिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ लोगों ने उन्हें बाथरूम में बंद करने की कोशिश की। विरोध करने पर कथित तौर पर जमीन पर गिराकर उनका गला जोर से दबाया गया, जिससे उनकी जीभ बाहर निकल आई और सिर में कंपन महसूस होने लगा।
तहरीर के मुताबिक, इसी बीच कमरे का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाया गया, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सर्वेश ने बताया कि इसके बाद एक पुलिसकर्मी ने उन्हें उठाया और पानी पिलाया, जिसके बाद उन्हें होश आया। पुलिसकर्मी उन्हें थाने ले गए, जहां उन्होंने अपने होशो-हवास में शिकायत दर्ज कराई।
थाने में पत्नी को भी पीटने का आरोप
मामले को और गंभीर बनाते हुए सर्वेश ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि थाने पहुंचने के बाद उन्होंने फोन कर अपनी पत्नी प्रीति शुक्ला को बुलाया। पत्नी के थाने पहुंचने पर वही मास्क लगाए डॉक्टर वहां मौजूद था, जिसने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के सामने उनकी पत्नी के पेट में लात मारी। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सरकारी अस्पताल में मरीज की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
एसआरएन अस्पताल जैसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान में यदि किसी मरीज के तीमारदार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल मारपीट का मामला नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा, आपातकालीन उपचार तथा अस्पताल की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा। गंभीर मरीज को इलाज उपलब्ध कराने के बजाय कथित दुर्व्यवहार और हिंसा की शिकायत व्यवस्था पर कठोर सवाल खड़े करती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सीसीटीवी फुटेज, संबंधित कक्ष में मौजूद कर्मचारियों और डॉक्टरों की पहचान, मेडिकल रिपोर्ट तथा कथित तौर पर छीने गए सामान के संबंध में क्या कार्रवाई करती है। साथ ही अस्पताल प्रशासन की ओर से भी पूरे घटनाक्रम पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण और जांच की स्थिति सामने आनी चाहिए। उपलब्ध तहरीर में शिकायतकर्ता के आरोप दर्ज हैं। डॉक्टरों या अस्पताल प्रशासन का पक्ष तथा पुलिस की जांच का निष्कर्ष समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं हुआ था।

अन्य समाचार