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मुंबई की हवा में जहर…फडणवीस सरकार बोले, `सब ठीक बा!’

-निजी एजेंसी ने बताया देश का सबसे प्रदूषित शहर, सरकारी आंकड़ों में हवा संतोषजनक
-एक्यूआई मापने के अलग-अलग पैमानों ने खड़े किए सवाल; आखिर मुंबईकर किस पर करें भरोसा?

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई की हवा आखिर कितनी जहरीली है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि एक ही दिन दो संस्थाओं ने महानगर की वायु गुणवत्ता की बिलकुल अलग तस्वीर पेश की। स्विस संस्था आईक्यूएयर ने १५ अक्टूबर को मुंबई को अपनी सूची में भारत का सबसे प्रदूषित शहर बताया, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने हवा की गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की। आईक्यूएयर की सूची में मुंबई दुनिया के १२२ शहरों में पांचवें स्थान पर थी। लेकिन सरकारी आंकड़ों में प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया।
इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल के अनुसार, इस अंतर के पीछे निगरानी केंद्रों की संख्या, उनकी स्थिति और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की गणना के अलग-अलग मानक प्रमुख कारण हैं। आईक्यूएयर अमेरिकी एक्यूआई मानकों का इस्तेमाल करता है, जबकि सीपीसीबी भारतीय मानकों के आधार पर आकलन करता है। दोनों की प्रदूषण श्रेणियों की सीमाएं अलग हैं। इसलिए उनके आंकड़ों की सीधी तुलना भ्रामक हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई में निर्माण कार्यों की धूल, वाहनों का धुआं, कमजोर हवाएं और अधिक तापमान प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। सवाल यह है कि जब नागरिकों को एक ही शहर की हवा के बारे में अलग-अलग चेतावनियां मिलें, तो वे स्वास्थ्य संबंधी निर्णय किस आधार पर लें? विशेषज्ञों ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और स्थानीय प्रदूषण केंद्रों की जानकारी सार्वजनिक करने की आवश्यकता जताई है।

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