-शरद पवार की राष्ट्रवादी ने पुणे और संभाजीनगर में कब्जा रखा बरकरार
-मुख्यमंत्री फडणवीस के नागपुर में कांग्रेस ने बीजेपी के छुड़ाए छक्के
सामना संवाददाता / मुंबई
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की पांच सीटों के लिए आखिरी क्षणों तक चली कांटे की टक्कर में महाविकास आघाड़ी ने सत्ताधारी महायुति को जोरदार झटका दिया। पुणे और मराठवाड़ा के छत्रपति संभाजीनगर से मौजूदा विधायकों के महायुति में चले जाने के बावजूद, राष्ट्रवादी ने इन दोनों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखते हुए सत्ताधारियों को महाविकास आघाड़ी की ताकत दिखाई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नागपुर में कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी और नागपुर स्नातक सीट के लिए अंत तक संघर्ष किया।
महाराष्ट्र विधान परिषद के पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर स्नातक तथा पुणे और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की पांच सीटों पर हुए चुनाव में महाविकास अघाड़ी बनाम महायुति की सीधी भिड़ंत हुई। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में दोस्ताना मुकाबले होने के कारण पूरे राज्य की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि किसे झटका लगेगा। मंगलवार सुबह ८ बजे से इस चुनाव की मतगणना प्रक्रिया शुरू हुई। इन पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में जीत के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता के वोटों का कोटा कोई भी उम्मीदवार पूरा नहीं कर सका। इस वजह से द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती करनी पड़ी और मतगणना प्रक्रिया पूरी होकर विजेता उम्मीदवार की घोषणा के लिए दूसरे दिन तक इंतजार करना पड़ा।
मराठवाड़ा में राष्ट्रवादी ने अजीत दादा गुट को दिया झटका
मराठवाड़ा के छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अजीत पवार गुट को करारा झटका दिया है। राष्ट्रवादी के उम्मीदवार डॉ. प्रतापसिंह पाटील ने लगातार तीन टर्म विधायक रहे अजीत पवार गुट के सतीश चव्हाण को शिकस्त दी। चव्हाण २००८ में पहली बार यहां से चुने गए थे, जिसके बाद वे लगातार तीन टर्म तक विधायक रहे। महायुति के आंतरिक मतभेद और पिछले अठारह वर्षों की सत्ता विरोधी लहर का बड़ा नुकसान उन्हें चुनाव में उठाना पड़ा।
पुणे स्नातक में राष्ट्रवादी ने बीजेपी को पटखनी दी
पुणे स्नातक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख ने स्मिता जाधव को हराकर बीजेपी को जोरदार पटखनी दी। पुणे स्नातक की सीट को बीजेपी ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था। पिछले चुनाव में यह सीट राष्ट्रवादी ने जीती थी, फिर भी महायुति में यह सीट जिद करके अजीत दादा गुट से छीन ली गई थी।
