राजन पारकर / मुंबई
-एमआईएफएफ की चमक-दमक पर उठे सवाल
-सादगी और ईंधन बचत की अपील के बीच शाही इंतजामों की चर्चा
एक तरफ देश ऊर्जा संकट, बढ़ती ईंधन कीमतों और संसाधनों की बचत की चुनौती से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर मुंबई में आयोजित होने जा रहे मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (एमआईएफएफ) की तैयारियों को लेकर सरकारी खर्च और शाही इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर करीब १२ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
आयोजन की जिम्मेदारी जनरल मैनेजर डी. रामकृष्ण और मैनेजिंग डायरेक्टर एमडी प्रकाश मगदूम के नेतृत्व में बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, समारोह में शामिल होने के लिए १०० से अधिक विदेशी मेहमानों के आने की संभावना है। उनके ठहरने के लिए दक्षिण मुंबई के आलीशान होटलों के आसपास करीब १५० कमरों की बुकिंग किए जाने की चर्चा है। वहीं आवागमन के लिए १०० से अधिक किराये की गाड़ियों की व्यवस्था भी किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।
यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सादगी, अनावश्यक खर्चों में कटौती और ईंधन बचाने का संदेश दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि आम नागरिकों को पेट्रोल-डीजल की बचत करने और सीमित संसाधनों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है, तो सरकारी आयोजनों में इतनी बड़ी मात्रा में वाहनों और सुविधाओं का इस्तेमाल किस आधार पर किया जा रहा है?
कला, संस्कृति और सिनेमा का सम्मान निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन क्या इसके नाम पर करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन से होने वाली कथित भव्यता उचित है? जनता अब पारदर्शिता की मांग कर रही है। लोगों का कहना है कि आयोजन के बजट, होटल बुकिंग, वाहनों की संख्या और अन्य खर्चों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
जनता का सवाल: सादगी सिर्फ आम लोगों के लिए?
प्रधानमंत्री लगातार ईंधन बचाने और फिजूलखर्ची रोकने की अपील कर रहे हैं। लेकिन (एमआईएफएफ) में १०० से ज्यादा गाड़ियों और आलीशान होटल व्यवस्थाओं की चर्चाओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता पूछ रही है कि क्या बचत और सादगी का संदेश सिर्फ आम नागरिकों के लिए है, सरकारी आयोजनों के लिए नहीं?
