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बांग्लादेश से फ्रांस तक साजिश!..रिजिजू साहब, सबूत की ट्रेन किस स्टेशन पर अटक गइल बा?

देश की राजनीति में अब सरकार बदलने की बात करना भी अंतरराष्ट्रीय रहस्यकथा बन गया है! केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बांग्लादेश की हिंसा और प्रâांस के दंगों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भारत में भी वैसी ही परिस्थितियां पैदा करने की साजिश रची गई थी। कुछ राजनेताओं और भारत-विरोधी तत्वों पर युवाओं को भड़काने का आरोप भी लगा दिया। अरे मंत्री जी, ई तो बड़ी गंभीर बात बा!
अगर देश में विदेशी ताकतें सरकार गिराने की साजिश कर रही हैं, तो जांच किसने की? किसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ? साजिश के दस्तावेज कहां हैं? जनता को भी तो बताइए! रिजिजू साहब ने बिल्कुल सही कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन चुनावों से ही होगा। लेकिन भैया, चुनाव के जरिए सरकार बदलने की मांग करना भी तो लोकतंत्र का ही हिस्सा है!
उधर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी विपक्ष को ‘रेजीम चेंज गैंग’ बताकर निशाना साधा। छात्रसंघ, स्थानीय निकाय और उपचुनावों में भाजपा तथा उसके समर्थक संगठनों की जीत गिनाकर विपक्ष को आत्ममंथन की सलाह दी।
वाह मामा, वाह! लेकिन भिया, एक सवाल है। चुनावी जीत सरकार को जनादेश देती है, मगर क्या उसके बाद जनता के सवाल पूछने का अधिकार समाप्त हो जाता है? हिंसा भड़काने का कोई अधिकार नहीं है। मगर शांतिपूर्ण आंदोलन, सरकार की आलोचना और हिंसक सत्ता परिवर्तन की साजिश; तीनों अलग-अलग बातें हैं।
साजिश सचमुच है तो प्रमाण सामने रखिए और कानून के अनुसार कार्रवाई कीजिए। केवल राजनीतिक भाषणों से अपराध साबित नहीं होते! अब बताइए, सरकार बदलने की लोकतांत्रिक मांग को अंतरराष्ट्रीय साजिश बताने वाली राजनीति सठिया गइल का… कि सवालों का जवाब देने से आसान साजिश का शोर मचाना हो गइल बा?

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