सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका में विकास कार्यों और समस्याओं के समाधान के नाम पर हर छोटे-बड़े प्रोजेक्ट के लिए लाखों-करोड़ों रुपए की भारी-भरकम फीस देकर सलाहकार (रायचंदों को) नियुक्त करना जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाने का जरिया बन चुका है। ताजा मामला उत्तन के धावगी डंपिंग यार्ड का है, जहां सालों से जमा ९ लाख मीट्रिक टन से अधिक पुराने कचरे के निपटान की तकनीकी निगरानी के लिए अब आईआईटी पवई को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट यानी ‘रायचंदों को नियुक्त करने की तैयारी की जा रही है। इस बिना निविदा वाले प्रस्ताव को मंजूरी के लिए आगामी स्थायी समिति की बैठक में रखा गया है। हालांकि, विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे जनता के पैसे की बर्बादी और आर्थिक घोटाला करार दिया है।
उत्तन कचरा डिपो में जमा ९,०९,६३० मीट्रिक टन पुराने कचरे का बायो-माइनिंग पद्धति से वैज्ञानिक निपटान करना और उस पर तांत्रिक निगरानी रखना है। आईआईटी कचरे के निपटान के काम का दैनिक निरीक्षण करेगा, प्रगति पर नजर रखेगा और तकनीकी कंसलटेंसी प्रदान करेगा। मनपा ने वित्तीय वर्ष २०२६-२७ के बजट में पुराने कचरे के प्रसंस्करण के लिए २३ करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जिसमें से वर्तमान में १.०२ करोड़ उपलब्ध हैं। कंसलटेंट की नियुक्ति का मुख्य खर्च अगले वित्तीय वर्ष में होगा। गौरतलब है कि कचरा निपटान के लिए पात्र ठेकेदार को सितंबर २०२६ में कार्यादेश दिया जा चुका है।
तकनीकी झुनझुना
हाल ही में मनपा ने ५ साल के ‘बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर’ (बीओटी) तत्व पर ‘मोबाइल मेम्ब्रेन एडवान्स सिस्टम’ लाकर लीचेट फिराने (प्रक्रिया करने) के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। दावा है कि इस सिस्टम के जरिए हर रोज २५,००० लीटर लीचेट पर प्रक्रिया करने की क्षमता होगी।
हालांकि मनपा के इस कदम को कचरे के पहाड़ और उससे रिसने वाले जहरीले पानी (लीचेट) से परेशान ग्रामीणों को रिझाने वाला ‘तकनीकी झुनझुने’ के रूप में देखा जा रहा है।
कागजी सलाह पर करोड़ों खर्च करने का आरोप
प्रशासन को घेरते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया है कि खुद के पास खुद का मजबूत प्रशासनिक और इंजीनियिंरग ढांचा मौजूद होने के बावजूद मनपा ने इससे पहले भी उत्तन कचरा डिपो के लिए कई सलाहकार नियुक्त किए हैं। इन सलाहकारों द्वारा केवल कागजी रिपोर्ट दी जाती है, जिसका जमीन पर कोई क्रियान्वयन नहीं होता। सालों से कचरा साफ करने का काम चलने के बावजूद समस्या जस की तस है। अब एक बार फिर नए सलाहकार पर करोड़ों रुपये खर्च करने से परियोजना की लागत बढ़ेगी और जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग होगा।
मनपा का दावा
दूसरी ओर, मनपा प्रशासन का तर्क है कि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान (बायो-माइनिंग) एक जटिल तकनीकी प्रक्रिया है। ठेकेदार के दैनिक काम की गुणवत्ता जांचने, प्रगति पर नजर रखने और किसी भी तकनीकी खामी से बचने के लिए आईआईटी पवई जैसी प्रतिष्ठित संस्था का मार्गदर्शन जरूरी है।
