मुख्यपृष्ठनए समाचार११,४४० करोड़ का मिशन शोध की मंजूरी शून्य!

११,४४० करोड़ का मिशन शोध की मंजूरी शून्य!

-दालों में आत्मनिर्भरता के छह वर्षीय मिशन का पहला साल बीता; अनुसंधान के लिए निर्धारित ` ५०० करोड़ के तहत एक भी परियोजना को हरी झंडी नहीं
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
लक्ष्य बड़ा, बजट उससे भी बड़ा, लेकिन शोध के मोर्चे पर रफ्तार जीरो। दालों में आत्मनिर्भरता के लिए शुरू किए गए ११,४४० करोड़ रुपए के छह वर्षीय मिशन के पहले साल का लेखा-जोखा चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक, अनुसंधान के लिए निर्धारित ५०० करोड़ रुपए के तहत एक भी परियोजना को अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है।
सरकार ने देश को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस महत्वाकांक्षी मिशन की घोषणा की थी। इसमें उत्पादन बढ़ाने, आयात घटाने और किसानों की आय सुधारने का लक्ष्य रखा गया था। मिशन का एक अहम स्तंभ है- अनुसंधान और विकास। इसके लिए पहले साल ५०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, ताकि बेहतर बीज, रोग-रोधी और बदलते मौसम को झेलने वाली उन्नत किस्में विकसित की जा सकें। लेकिन हकीकत यह है कि पूरा पहला साल मंजूरी की फाइलों में ही निकल गया।
अपील से नहीं आएगी आत्मनिर्भरता
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ज्यादा बुआई की अपील से आत्मनिर्भरता नहीं आएगी। बेहतर उत्पादकता के लिए साइंस का साथ जरूरी है। यदि शोध प्रस्तावों की मंजूरी में ही एक साल लग जाए, तो लैब से खेत तक तकनीक पहुंचने के लिए बचे पांच साल भी कम पड़ सकते हैं। इससे मिशन की समयबद्धता पर सीधा असर पड़ेगा।
क्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न
अब तीन बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पहला, परियोजनाएं मंजूर क्यों नहीं हुर्इं? क्या पर्याप्त प्रस्ताव नहीं आए? दूसरा, क्या मूल्यांकन प्रक्रिया अधूरी रही? और तीसरा, क्या प्रशासनिक देरी वजह बनी? यह कहना गलत होगा कि पूरे मिशन का काम ठप है, क्योंकि बुआई, खरीद और अन्य घटकों पर काम चल रहा है। लेकिन शोध जैसा बुनियादी हिस्सा अगर पहले साल ही सुस्त पड़ा है, तो यह क्रियान्वयन क्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
सरकार बताए टाइम-बाउंड रोडमैप
आत्मनिर्भरता का असली हिसाब बजट की घोषणा से नहीं, मंडी में बढ़ी आवक और किसान के खाते में बढ़ी आय से होगा। इसलिए जरूरी है कि सरकार अब पारदर्शिता के साथ बताए कि देरी क्यों हुई, अगले वर्षों में इसकी भरपाई वैâसे होगी और इसकी जवाबदेही किसकी होगी, साथ ही मंजूरी से लेकर खेत तक परिणाम पहुंचाने का टाइम-बाउंड रोडमैप देश के सामने रखे।

 

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