मुख्यपृष्ठनए समाचारवीडियो रिकॉर्डिंग पर महासंग्राम, सत्ताधारी भाजपाई हुए बेलगाम!

वीडियो रिकॉर्डिंग पर महासंग्राम, सत्ताधारी भाजपाई हुए बेलगाम!

-सिर्फ एफआईआर काफी नहीं, कुर्सी खाली करो’
-मनपा ऐक्ट के तहत ‘निष्कासन’ की हुंकार

सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका की महासभा में नागरिक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र गाली-गलौच, मारपीट और बदसलूकी करने वाले सत्ताधारी भाजपा के नगरसेवकों के खिलाफ अब जनता और मीडिया का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शुक्रवार को महासभा में उस समय लोकतांत्रिक मर्यादाएं तार-तार हो गईं, जब सदन की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करने को लेकर सत्ताधारी भाजपा के नगरसेवकों और आम नागरिकों व पत्रकारों के बीच झड़प हो गई। इस मामले में पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता करण तानाजी पवार की शिकायत पर भाजपा के १६ नगरसेवकों और एक पार्टी कार्यकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन इस निंदनीय घटना के दो मुख्य पहलू अब इस विवाद की जान बन चुके हैं-पहला, आरोपी नगरसेवकों का पद से परमानेंट निष्कासन और दूसरा, पुलिस द्वारा ‘पत्रकार संरक्षण कानून’ का सरेआम गला घोंटना। पूर्व नगरसेवक और सिटिजन फ्रंट के अध्यक्ष रोहित सुवर्णा का स्पष्ट कहना है कि आरोपी पार्षदों पर केवल एफआईआर दर्ज करना काफी नहीं है। मांग की जा रही है कि ‘महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम एक्ट, १९४८ की धारा १३(१) (ए) के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए इन सभी १६ भाजपा नगरसेवकों को तुरंत उनके पदों से बर्खास्त (निष्कासित) किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बहाल हो सके।
‘पत्रकार संरक्षण कानून’ को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस उपायुक्त राहुल चव्हाण से मुलाकात कर हमलावर नगरसेवकों के खिलाफ सख्त ‘पत्रकार संरक्षण कानून’ के तहत स्वतंत्र अपराध दर्ज करने की पुरजोर मांग की थी। आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस इस विशेष कानून के तहत अलग से मामला दर्ज करने से बच रही है। पुलिस के इस अड़ियल रुख के बाद पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन जानबूझकर पत्रकार संरक्षण कानून को दरकिनार कर रहा है। घटना के ४८ घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पत्रकारों की
भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को टारगेट बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता करण पवार का आरोप है कि वे और उनके साथी कृष्णा गुप्ता इलाके में खराब सड़कों और अवैध निर्माणों के खिलाफ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते हैं, जिससे प्रशासन पर काम का दबाव बनता है। इसके अलावा, कृष्णा गुप्ता ने रौप्य महोत्सव समिति द्वारा की गई घड़ी खरीदी में कम दाम की घड़ियों की कीमत ज्यादा दिखाकर किए गए भ्रष्टाचार को उजागर किया था और इसकी शिकायत प्रशासन से की थी, इसलिए सत्ताधारी भाजपा के नगरसेवक उनसे रंजिश रखते थे। सुरक्षा से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई न होने से भायंदर के मीडियाकर्मियों में तीव्र असंतोष है।

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