-संभाजीनगर के सियासी ड्रामे पर मुख्यमंत्री के तीखे तेवर!
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सब कुछ ठीक होने के दावों के बीच सहयोगी दलों की खींचतान एक बार फिर सामने आ गई है। विधकन परिषद में छत्रपति संभाजीनगर स्नातक कोटे के चुनाव में शिंदे गुट द्वारा दादा गुट के उम्मीदवार सतीश चव्हाण से समर्थन वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ शब्दों में सवाल किया कि जब सभी दल महायुति में साथ हैं, तो फिर अलग-अलग रुख अपनाने की जरूरत क्या है? फडणवीस के इस बयान को शिंदे गुट की राजनीतिक नौटंकी पर अप्रत्यक्ष फटकार के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के अलग रुख को पूरे दल का आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता। संबंधित दल के नेतृत्व को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। उनके इस बयान ने महायुति के भीतर आपसी तालमेल और नेतृत्व की पकड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, विवाद की शुरुआत अमरावती शिक्षक कोटे के चुनाव से हुई। वहां शिंदे के उम्मीदवार किरण सरनाईक के खिलाफ दादा गुट के कुछ नेताओं द्वारा दूसरे उम्मीदवार का समर्थन किए जाने के आरोप लगे। इसके बाद संजय शिरसाट ने सतीश चव्हाण से समर्थन वापस लेने की घोषणा की।
हालांकि, बाद में उन्होंने महायुति के साथ रहने और चव्हाण का समर्थन करने की बात भी कही। इस घटनाक्रम ने गठबंधन की राजनीति में असमंजस बढ़ा दिया।
