सामना संवाददाता / मुंबई
देश में बढ़ती तानाशाही के बीच यदि चुनाव के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार छीना जा रहा है और आंदोलन करने का हमारा अधिकार भी छीन लिया जा रहा है, तो ऐसी सत्ता को उखाड़ फेंकना ही चाहिए। हां, हम इस सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए ही खड़े हैं। जो कहना है, कह लीजिए! इन तीखे शब्दों में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा को सीधी चुनौती दी।
अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद की ओर से आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में उद्धव ठाकरे बोल रहे थे। आंदोलन के दौरान पुलिस की बर्बरता को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि हमारे सामने देश बर्बाद हो रहा हो और हम चुपचाप देखते रहें, तो इससे बेहतर है कि हम आत्महत्या कर लें। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछने वाले हर व्यक्ति को देशद्रोही क्यों ठहराया जाता है। विरोध की आवाज उठाने वालों पर व्यवस्था बदलने की साजिश रचने के आरोप क्यों लगाए जाते हैं। यह वैâसी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि अगर राजा गलती कर रहा है, तो उसे उसकी गलती बतानी ही चाहिए। लेकिन आज राजा को उसकी गलती बताने वाले व्यक्ति को देशद्रोही ठहराकर जेल में डाल दिया जाता है। आज लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी को एकजुट होकर तानाशाही सरकार के खिलाफ लड़ना होगा।
उद्धव ठाकरे ने पुलिस कार्रवाई पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी कोई सवाल पूछता है, तो उसे देशद्रोही करार दिया जाता है। कहा जाता है कि व्यवस्था बदलने की साजिश रची जा रही है। फिर नवरात्रि के दौरान दिल्ली में हजारों पुलिसकर्मियों को क्या डांडिया खेलने के लिए तैनात किया गया है? यही पुलिस बच्चों के सिर फोड़ रही है और महिलाओं तथा लड़कियों को घसीटकर ले जा रही है। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे कथित हमलों को लेकर सरकार को घेरा और स्पष्ट किया कि जनता के मताधिकार तथा आंदोलन के अधिकार को कुचलने वाली सत्ता के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
