-मंत्रियों के बंगलों के नवीनीकरण से सुर्खियों में रहे इंजीनियरों को मिली राहत
सुनील ओसवाल / मुंबई
सार्वजनिक निर्माण विभाग में तबादलों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। विभाग के भीतर बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, इन तबादलों की ‘मार्केटिंग’ सीधे मंत्रालय स्तर पर की गई, जिसमें एक महिला उप अभियंता की भूमिका बताई जा रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कथित अनियमितताओं की शिकायतों के कारण बीते चार महीनों से तबादलों पर रोक लगाई थी, लेकिन बुधवार को अचानक १३६ उप अभियंताओं की ‘बेमौसमी’ तबादला सूची जारी कर दी गई। आश्चर्य की बात यह है कि जिन अधिकारियों के नाम बार-बार विवादों में आते रहे हैं उन्हें इस बार भी बख्श दिया गया है। मंत्रियों के बंगलों के नवीनीकरण कार्य से जुड़े रहे उपविभागीय अभियंता अशोक गायकवाड, संजय घरत, मलबार हिल के डावकर, वरली के अनिल पनाड और आकाश लड्डा जैसे नाम इस सूची से बाहर रखे गए हैं, वहीं मनोरा प्रयोगशाला में कार्यरत हेमंत भोईर को उनकी ‘सुविधा’ के अनुसार विक्रमगढ़ भेजा गया है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिन अभियंताओं ने मंत्रालय में ‘मार्वेâटिंग’ करनेवालों को मोटी रकम दी, उन्हें इस तबादले से राहत मिल गई। कई अभियंता ऐसे भी हैं जो मुंबई में तीन वर्ष पूरे कर चुके हैं, लेकिन उनका स्थानांतरण नहीं हुआ।
अंधेरी विभाग पर गंभीर आरोप
मुंबई के अंधेरी सार्वजनिक निर्माण विभाग का नाम बार-बार विवादों में आता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्यालय आम जनता के लिए लगभग बंद है। यहां केवल ठेकेदारों और उनके प्रतिनिधियों को ही आसानी से प्रवेश दिया जाता है। कार्यालय के सुरक्षाकर्मी किसी आम नागरिक को भीतर नहीं जाने देते। विभाग में कार्यरत अभियंता मिलिंद मराठे और ठाणे से पदोन्नति पर आए अभियंता परदेशी पर आरोप है कि उन्होंने कार्यालय को ठेकेदारों के हित में ‘निजी दफ्तर’ की तरह चला रखा है।
सवालों के घेरे में पारदर्शिता
तबादले प्रशासनिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन यदि इनमें पैसों और सियासी रसूख का खेल चलता रहा तो यह शासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। फिलहाल, विभाग ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
