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कूपर अस्पताल में चूहों का महाप्रकोप… दो महीनों में छह मरीजों को काटा!

-आपातकालीन पुलिस रिपोर्ट में दर्ज

-प्रशासन की गलती, मरीजों को चुकानी पड़ रही कीमत

सामना संवाददाता / मुंबई

मरीजों को जीवनदान देनेवाला मुंबई का प्रतिष्ठित कूपर अस्पताल इन दिनों चूहों के महाप्रकोप से जूझ रहा है। पिछले दो महीनों में अस्पताल की खराब साफ-सफाई व्यवस्था ने छह मरीजों की जान खतरे में डाल दी, जिन्हें वॉर्ड के भीतर चूहों ने काट लिया। यह चौंकाने वाली घटना आपातकालीन पुलिस रिपोर्ट में दर्ज हुई है, जो सीधे तौर पर प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है। आरटीआई से चौंका देनेवाले इस तथ्य के सामने आने के बाद अब सवाल उठने लगा है कि जब अस्पताल खुद ही संक्रमण का अड्डा बन गया है, तो आखिर गंदगी की कीमत चुका रहे इन बीमार और बेबस रोगियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।
उल्लेखनीय है कि कूपर अस्पताल में पिछले दो महीनों में छह मरीजों को चूहों ने काटा है। यह जानकारी पुलिस द्वारा सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराई गई है। चूहों द्वारा काटे जाने के मामले की जुहू पुलिस में आपातकालीन पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। ऐसा अनुमान है कि इनमें से अधिकांश घटनाएं सितंबर महीने में हुर्इं। फिलहाल, मनपा अस्पतालों की निदेशक डॉ. नीलम आंद्राडे ने सिर्फ दो ही घटनाएं हुर्इं बताया था। हालांकि, सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी से अस्पताल प्रशासन द्वारा चूहों द्वारा काटे जाने की घटनाएं छिपाने का प्रयास किए जाने का पता चला है। दूसरी तरफ यह भी बताया गया है कि कूपर अस्पताल में गंदगी के कारण चूहों का आतंक पैâला हुआ था। इसी के चलते महिला रोगी वॉर्ड में ५ सितंबर को चूहे द्वारा दो मरीजों को काटे जाने की घटनाएं सामने आर्इं। इस संदर्भ में खबर सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल सफाई के मामले में नायर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. शैलेश मोहिते की अगुवाई में एक समिति गठित की। इस समिति ने तुरंत कार्रवाई करके सफाई करनेवाले ठेकेदार से अस्पताल की सफाई करवाई। साथ ही विभाग कार्यालय के अधिकारियों ने चूहों की रोकथाम के उपाय किए। इसके अलावा मरीजों और उनके रिश्तेदारों के बीच जन जागरूकता अभियान चलाया गया। इससे चूहों की संख्या नियंत्रण में आ गई।
घटना के बाद मांगी गई जानकारी
कूपर अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों के चूहों द्वारा काटे जाने की घटनाएं सितंबर में सामने आने के बाद इन घटनाओं के बारे में सूचना के अधिकार से जानकारी मांगी गई। उस समय यह पता चला कि अस्पताल में छह घटनाएं हुर्इं। अस्पताल में अव्यवस्था या आंतरिक कलह का दंश मरीजों को झेलना पड़ रहा है। आरटीआई कार्यकर्ता चेतन कोठारी ने यह सवाल उठाया है कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को क्यों भुगतना पड़े।
ठेकेदार को केवल कारण बताओ नोटिस
चूहों द्वारा काटे जाने की इतनी घटनाएं होने के बाद संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय उसे कारण बताओ नोटिस और मामूली दंडात्मक कार्रवाई करके छूट देने का प्रयास मुंबई मनपा द्वारा किया गया। इसके बाद भी ठेकेदार द्वारा सफाई की उपेक्षा की जा रही है। यह बात हाल ही में अस्पताल में कर्मचारियों द्वारा किए गए धरने से स्पष्ट हुई है।

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