सामना संवाददाता / जौनपुर
मां की ममता पूरी तरह निःस्वार्थ, पवित्र और असीम स्नेह से भरी होती है। मां का प्यार बिना किसी स्वार्थ या शर्त के होता है। वह अपने बच्चों की खुशी के लिए हर कष्ट सह लेती है। रामजानकी मंदिर , घनश्यामपुर में आयोजित तीन दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से बोलते हुए प्रख्यात कथावाचक मानस कोविद डा मदन मोहन मिश्र ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि माँ का आँचल बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित और शांतिपूर्ण जगह होती है। इस दुनिया में माँ का स्थान कोई दूसरा नहीं ले सकता है। अंतिम दिन कथा में शामिल होने वाले प्रमुख लोगों में विधायक रमेश चंद्र मिश्र, कमला प्रसाद तिवारी बड़े बाबू, पूर्व प्रधानाचार्य रामअनंद पांडे, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे,कॉलेज प्रबंधक गौरव सिंह, पूर्व प्रधान राम जियावन तिवारी, रघुवंश मणि त्रिपाठी, पूर्व प्रधान रमाशंकर मिश्र, बटेश्वर पांडे, पूर्व प्रधान राम सागर दुबे, शिक्षक नेता उमेश मिश्रा, रामधारी तिवारी, रामफेर पांडे, हृदय प्रकाश तिवारी, शशिधर तिवारी, जोखन सेठ, डॉ जैनेंद्र तिवारी,अम्बुज तिवारी, स्वतंत्र कुमार मिश्र, भैया लाल तिवारी,अजय सोनी, हरिओम बरनवाल, शिवपूजन बरनवाल, वीरेंद्र मिश्र, श्रवण तिवारी, गोरखनाथ अग्रहरी,जनार्दन बरनवाल, राजेंद्र सिंह, शिवाजी शुक्ला, आलोक पाठक, शुभम हलवाई, अमरीश अग्रहरि, मनोज तिवारी, अश्वनी पांडे, गायक शिवा मोदनवाल समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
