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संपादकीय : चर्चा का २५वां दौर!

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल फिलहाल (एक बार फिर) चीन के दौरे पर हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राष्ट्र को यानी वास्तव में किसे सलाह देते हैं? उनकी सलाह से क्या होता है? यह तो वही जानें, लेकिन बीजेपी के लिए ये जनाब किसी ‘जेम्स बॉन्ड’ से कम नहीं हैं। इसीलिए ‘धुरंधर’, ‘उरी’ जैसी फिल्मों की शृंखला में इस भारतीय जेम्स बॉन्ड का किरदार अनिवार्य रूप से गढ़ा जाता है। इसे फिलहाल का मनोरंजन ही कहना चाहिए। अब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार चीन गए हैं। मिस्टर डोभाल की चीन के विदेश मंत्री और विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर यह २५वीं बैठक है। सवाल सिर्फ इतना है कि २५ दौर की बातचीत के बाद भी सीमा विवाद क्यों नहीं सुलझा? उल्टा सीमा विवाद और ज्यादा जटिल और तनावपूर्ण होता जा रहा है। इस दौरान सीमा विवाद तो नहीं सुलझा, लेकिन भारत-चीन व्यापार के आंकड़े जरूर बढ़ गए और ये आंकड़े भारी पैमाने पर चीन के ही पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। इसलिए मिस्टर डोभाल चीन सीमा विवाद सुलझाने जाते हैं या चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत करने और उनका व्यापार बढ़ाने जाते हैं? भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एएलसी) ३,४८८ किलोमीटर है। २०२० में इसी मुद्दे पर गलवान में रक्तपात हुआ था। भारत के २० जवान चीनियों के हाथों मारे गए थे। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने तब कोई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ करके चीन को पीछे धकेलने की सलाह क्यों नहीं दी? पाकिस्तान पर फुंफकारने वाले ये सलाहकार चीन के मामले में तो
बिना दांत वाले नाग की तरह
कुंडली मारकर बैठ जाते हैं। अगस्त २०२५ में जब वांग यी भारत आए थे, तब २४वें दौर की बातचीत हुई थी। उसके बाद चीन ने ११ बार अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों के मुताबिक, चीनियों ने अरुणाचल के कई गांवों पर कब्जा कर लिया है। लद्दाख के मामले में सोनम वांगचुक का भी यही कहना है। चीन ने लद्दाख में घुसकर भारत की जमीन हड़प ली है, जैसे ही वांगचुक ने यह कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर देशद्रोह जैसी धाराएं लगाई गईं। उम्मीद है कि चीन के साथ बातचीत में मिस्टर डोभाल इन घुसपैठ के मुद्दों को मजबूती से उठा रहे होंगे। चीन भारत का कोई मित्र नहीं है। पाकिस्तान को भारत-विरोधी बनाने और मजबूत करने में चीन का बड़ा योगदान है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय चीन ने पाकिस्तान को रसद और मदद पहुंचाकर भारत की घेराबंदी की, इस सच से मिस्टर डोभाल भी इनकार नहीं कर पाएंगे। चीन द्वारा भारत पर अप्रत्यक्ष आक्रमण और अतिक्रमण किए जाने के बावजूद, भारत ने वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में चीन को भारी आर्थिक मजबूती दी। इस दौरान भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार १५१ अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत का चीन को निर्यात लगभग १९.५ अरब डॉलर और चीन से आयात लगभग १३१.६ अरब डॉलर रहा, यानी इस द्विपक्षीय व्यापार में भी चीन ने भारत को पछाड़ दिया। भारत का व्यापार घाटा लगभग १३१.६ अरब डॉलर का है। भारत का
आर्थिक शोषण
चीन की तरफ से जारी है। भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार पूरी रफ्तार से चल रहा है। पाकिस्तानियों के साथ व्यापार करने वाले, रिश्ते रखनेवाले ‘देशद्रोही’ ठहराए जाते हैं, लेकिन चीन से व्यापार करने वाले और बातचीत के दौर चलाने वाले बड़े ‘कूटनीतिज्ञ’ माने जा रहे हैं। चीन से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन और कच्चा माल भारी मात्रा में आ रहा है। अब तो त्योहारों के सीजन में दीये, लाइटें, गणपति की मूर्तियां, देवी के मुखौटे तक वहीं से आ रहे हैं। फल और सब्जियां भी आ रही हैं। फिर मोदी जी के ‘मेड इन इंडिया, मेक इन इंडिया’ मिशन का क्या हुआ? अंधभक्त ‘चीनी सामान का बहिष्कार करो, वही राष्ट्रभक्ति है’ का शोर मचाएं और भारत सरकार घाटा सहकर भी चीन से व्यापार करे, यह घाटे का सौदा फिलहाल चीन के साथ जारी है। चीन की अर्थव्यवस्था दिन-ब-दिन मजबूत होती दिख रही है और वह भी भारत के सहयोग से। उसी मजबूत अर्थव्यवस्था का हिस्सा पाकिस्तान को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह हमने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वक्त अनुभव किया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह करने का दावा बार-बार किया गया था। अब उन आतंकी ठिकानों के फिर से सक्रिय होने की खबरें हमारी चिंता बढ़ा रही हैं और ऐसे समय में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आखिरकार क्या कर रहे हैं? पाकिस्तान का खतरा बना हुआ है। २५ दौर की बैठकों के बाद भी चीन-भारत सीमा विवाद रत्ती भर आगे नहीं बढ़ा है। भारत की सीमाओं पर तनाव के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। मिस्टर डोभाल अगर चीन में इस हाथ को जड़ से उखाड़ने गए हों तो बेहद खुशी की बात होगी!

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