-१५ दिन में बंटवारे का नया भरोसा, निधि को लेकर भी घटक दलों में खींचतान
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सब कुछ ठीक चल रहा है- सत्ता पक्ष के इस दावे पर अब उसकी अपनी ही समन्वय बैठक में सवाल उठते दिखाई दे रहे हैं। भाजपा, शिंदे गुट और अजीत पवार गुट के बीच चल रहे अंदरूनी मतभेदों को शांत करने के लिए बुलाई गई महायुति समन्वय समिति की बैठक में लंबे समय से अटके महामंडलों और जिला नियोजन निधि के बंटवारे पर लंबी चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं को महामंडलों में पद मिलने का लंबे समय से इंतजार है, लेकिन एक बार फिर उन्हें १५ दिन का नया ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया गया है। जनता विकास की प्रतीक्षा कर रही है, वहीं सत्ता के तीनों घटक निधि और पदों के बंटवारे को लेकर आपसी हिसाब-किताब में उलझे नजर आ रहे हैं।
१५ दिन का फिर मिला भरोसा
सूत्रों के अनुसार, अगले १५ दिनों में महामंडलों के बंटवारे पर अंतिम पैâसला होने की संभावना जताई गई है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में अंतिम समयसीमा है या फिर सत्ता में हिस्सेदारी की मांग कर रहे सहयोगी दलों और कार्यकर्ताओं को शांत रखने के लिए एक और आश्वासन?
महामंडलों में नियुक्तियों को लेकर महायुति के तीनों घटकों के बीच लंबे समय से रस्साकशी चलने की चर्चा है। ऐसे में १५ दिन की नई समयसीमा ने कार्यकर्ताओं की बेचैनी कम करने के बजाय सवाल और बढ़ा दिए हैं।
फडणवीस नाराज, नेताओं को दी हिदायत
महायुति के स्थानीय नेताओं द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाराजगी जताई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कोई भी विधायक या सांसद सहयोगी दल के नेताओं अथवा उनके दल के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी न करे। यानी जिस महायुति को जनता के विकास के लिए मजबूत गठबंधन बताया जाता है, उसके नेताओं को अब एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी से रोकने के लिए भी समन्वय बैठक का सहारा लेना पड़ रहा है। महामंडलों के बंटवारे से लेकर निधि के वितरण तक और सार्वजनिक बयानबाजी से लेकर आपसी समन्वय तक-महायुति के भीतर सब कुछ ‘ऑल इज वेल’ होने के दावे पर सवाल उठने लगे हैं।
निधि के बंटवारे पर भी खींचतान
जिला नियोजन निधि के बंटवारे को लेकर भी महायुति के भीतर मतभेद सामने आए हैं। तय
फॉर्मूले के अनुसार, जिला स्तर की ७० प्रतिशत निधि सीधे स्थानीय विधायकों के माध्यम से विकास कार्यों के लिए दी जाएगी, जबकि शेष ३० प्रतिशत निधि पालकमंत्रियों के पास रहेगी। पालकमंत्री इस निधि का समान रूप से वितरण करेंगे।
