-सुबह बोले, अब ज्यादा काम नहीं कर सकता, नई पीढ़ी को मौका मिले; अटकलें तेज हुर्इं तो दफ्तर बोला, बात राजनीति की थी ही नहीं
सामना संवाददाता / नागपुर
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने सुबह से राजनीतिक गलियारों में सनसनी मचा दी और शाम होते-होते उनके कार्यालय को सफाई देनी पड़ गई। गडकरी ने नागपुर में कहा था कि वे पिछले ३० वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं, अब पहले जितना काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को ज्यादा जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। बस फिर क्या था संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच इसे उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जाने लगा।
अब ‘राजनीतिक संन्यास’ पर लगाया ब्रेक
जैसे ही बात ‘राजनीतिक संन्यास’ तक पहुंची, गडकरी के कार्यालय ने तत्काल ब्रेक लगा दिया। सफाई आई कि उनका बयान राजनीति से संबंधित था ही नहीं। वे लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के कामकाज और उसके भावी नेतृत्व की बात कर रहे थे। कार्यालय ने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने बयान को संदर्भ से अलग करके राजनीतिक अर्थ दे दिया।
अब यहीं राजनीति का मजेदार विरोधाभास शुरू होता है। यदि नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने का दर्शन सिर्फ ट्रस्ट के लिए था तो राजनीति में पुरानी पीढ़ी अभी क्यों जरूरी है? और अगर उम्र, कार्यक्षमता और नई पीढ़ी को अवसर देने का सिद्धांत अच्छा है तो क्या वह केवल सामाजिक संस्था की चौखट तक सीमित रहना चाहिए?
गडकरी ६९ वर्ष के हैं और मोदी सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल हो चुका है और केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें भी चल रही हैं। इसलिए राजनीतिक अर्थ निकलना अस्वाभाविक नहीं था।
ऊपर से ई-२० पेट्रोल को लेकर गडकरी पहले ही जनता और विपक्ष की आलोचना झेल रहे हैं। ऐसे में ‘अब ज्यादा काम नहीं कर सकता’ वाली लाइन ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया। फिर आई सफाई, नहीं, नहीं… राजनीति की बात नहीं थी। यानी नई पीढ़ी को मौका जरूर मिलना चाहिए, लेकिन फिलहाल ट्रस्ट में। राजनीति में नहीं। वहां शायद अभी कुछ और मार्गदर्शन बाकी है! मोह है कि छूटता नहीं, बयान में वैराग्य आया,खबरों में संन्यास आया और दफ्तर से तुरंत संदेश आया ‘साहब कहीं नहीं जा रहे!’
