मुख्यपृष्ठनए समाचारबुलेट ट्रेन की रफ्तार में ठाणे-पालघर का भूगोल दांव पर!

बुलेट ट्रेन की रफ्तार में ठाणे-पालघर का भूगोल दांव पर!

-बुलेट ट्रेन के लिए ठाणे-पालघर में पहाड़…नदियां और मैंग्रोव के बीच भारी निर्माण

जेदवी / मुंबई

बुलेट ट्रेन की रफ्तार के साथ ठाणे-पालघर का प्राकृतिक भूभाग भी बड़े निर्माण बदलावों से गुजर रहा है। परियोजना की इंजीनियरिंग क्षमता भले ही दिखाई दे रही हो, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर पहाड़, नदियों और संवेदनशील क्षेत्रों के बीच हो रहे निर्माण से पर्यावरणीय संतुलन को लेकर सवाल भी उठना स्वाभाविक है।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब ठाणे और पालघर के प्राकृतिक भूभाग को चीरते हुए तेजी से आकार ले रही है। ठाणे के शिलफाटा से महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर स्थित जरोली गांव तक १३५.४५ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी है। परियोजना की रफ्तार को विकास की तस्वीर के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन इस निर्माण के बीच पहाड़, नदियां और संवेदनशील मैंग्रोव क्षेत्र भी सीधे प्रभावित होने वाले हैं।
इस पूरे सेक्शन में १२४.०२७ किलोमीटर वायाडक्ट और पुल बनाए जा रहे हैं। ठाणे, विरार और बोइसर में तीन एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण चल रहा है। ठाणे स्टेशन का कॉनकोर्स प्राकृतिक जमीन से करीब १२ मीटर ऊपर बनाया जा रहा है, ताकि पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में मौजूद मैंग्रोव को बचाया जा सके। हालांकि, परियोजना का विशाल निर्माण क्षेत्र अपने आप में पर्यावरणीय चुनौती को रेखांकित करता है।
नदियों पर विशाल पुल
उल्हास नदी पर ४६० मीटर, वैतरणा नदी पर २.३२ किलोमीटर और जगनी नदी पर ५१० मीटर लंबे पुल बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा ३६ पुल और क्रॉसिंग में १२ स्टील ब्रिज शामिल हैं, जो रेलवे लाइनों, मुंबई-नासिक हाईवे और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को पार करेंगे।
बुलेट ट्रेन की रफ्तार के साथ ठाणे-पालघर का प्राकृतिक भूभाग भी बड़े निर्माण बदलावों से गुजर रहा है। परियोजना की इंजीनियरिंग क्षमता भले ही दिखाई दे रही हो, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर पहाड़, नदियों और संवेदनशील क्षेत्रों के बीच हो रहे निर्माण से पर्यावरणीय संतुलन को लेकर सवाल भी उठना स्वाभाविक है।
१०० किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पियर निर्माण
परियोजना के लिए १०० किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पियर खड़े किए जा रहे हैं और करीब ७४ किलोमीटर के पियर गर्डर लगाने के लिए तैयार हो चुके हैं। निर्माण को गति देने के लिए महाराष्ट्र में ९ कास्टिंग यार्ड, ७ फुल-स्पैन लॉन्चिंग गैन्ट्री और ८ एसबीएस लॉन्चिंग गैन्ट्री काम कर रही हैं। पहाड़ी क्षेत्र भी इस परियोजना से अछूता नहीं है। सेक्शन में ७ पहाड़ी सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनमें ३ का ब्रेकथ्रू हो चुका है। अब इनमें ड्रेनेज, वॉटरप्रूफिंग और लाइनिंग का काम जारी है।

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