सामना संवाददाता / मुंबई
लंबे इंतजार के बाद यश बड़े पर्दे पर लौटे हैं और इस बार उनका अंदाज पहले से कहीं ज्यादा डार्क, रफ और खतरनाक नजर आता है। ‘केजीएफ चैप्टर 2’ के करीब चार साल बाद आई ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ एक ऐसी गैंगस्टर ड्रामा फिल्म है, जिसमें एक्शन के साथ रिश्तों, भावनाओं, लालच और बदले की कहानी भी देखने को मिलती है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और अक्षय ओबेरॉय जैसे कलाकार नजर आते हैं। ‘सामना’ की ओर से फिल्म को 3.5 स्टार दिए गए हैं।
कहानी में क्या है खास?
फिल्म की कहानी स्वतंत्रता के बाद के गोवा की पृष्ठभूमि में बुनी गई है, जहां अपराध की दुनिया, सत्ता, लालच और रिश्तों के बीच किरदारों की अपनी-अपनी लड़ाई चलती है। कहानी का केंद्र यश का किरदार है, जो गैंगस्टर की दुनिया में रहते हुए अपने अतीत और प्रायश्चित के सवालों से जूझता नजर आता है।
यश फिल्म में राया और रूमी यानी टिकट के दोहरे किरदार में दिखाई देते हैं। वहीं कियारा आडवाणी की नादिया, नयनतारा की गंगा और रुक्मिणी वसंत की हथियारों की डीलर मेलिसा कहानी को अलग-अलग परतें देती हैं। प्यार, धोखा, बदला और नैतिकता के धुंधले सवालों के बीच करीब 3 घंटे 12 मिनट की यह फिल्म अपनी दुनिया को विस्तार से सामने रखती है।
यश ने फिर दिखाया अपना मास अवतार
यश की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्क्रीन प्रेजेंस है और ‘टॉक्सिक’ में इसका भरपूर इस्तेमाल किया गया है। रफ लुक, दमदार अंदाज और किरदार का डार्क स्वभाव मिलकर यश को पूरी तरह अलग रंग में पेश करते हैं। कई मौकों पर उनका किरदार बिना ज्यादा कुछ कहे ही अपनी मौजूदगी दर्ज करा देता है।
कियारा आडवाणी और नयनतारा ने भी अपने किरदारों को गंभीरता के साथ निभाया है। खासतौर पर नयनतारा का किरदार कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूत करता है। हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत भी अपने ग्रे और नकारात्मक शेड्स वाले किरदारों में असर छोड़ती हैं।
निर्देशन और संगीत
गीतू मोहनदास ने फिल्म को पारंपरिक गैंगस्टर ड्रामा से थोड़ा अलग रखने की कोशिश की है। बड़े पैमाने के एक्शन के बीच कहानी में महिला किरदारों और उनके भावनात्मक पक्ष को भी जगह दी गई है। फिल्म का दृश्यांकन इसकी सबसे मजबूत बातों में शामिल है। बैकग्राउंड स्कोर भी एक्शन दृश्यों को ज्यादा प्रभावशाली बनाता है और कई जगह माहौल को और गहरा करता है।
हालांकि, 3 घंटे 12 मिनट का रनटाइम कुछ दर्शकों को लंबा महसूस हो सकता है। फिल्म की कहानी कई स्तरों पर आगे बढ़ती है, जिसकी वजह से बीच-बीच में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी भी लगती है।
‘टॉक्सिक’ सिर्फ बंदूक, गैंगस्टर और एक्शन की कहानी नहीं है। यह एक डार्क और स्टाइलिश दुनिया में रिश्तों, लालच, हिंसा और इंसानी कमजोरियों को तलाशने की कोशिश करती है। यश का दमदार अवतार फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है, जबकि इमोशनल हिस्से इसे महज एक मास एक्शन फिल्म बनने से रोकते हैं।
यश के फैंस और डार्क एक्शन-ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘टॉक्सिक’ बड़े पर्दे पर देखने लायक अनुभव हो सकती है।
रेटिंग: (3.5/5)
