-१५० तहसीलदारों पर पदोन्नति की बरसात
– सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को भी ठेंगा
सामना संवाददाता / मुंबई
निकाय चुनाव से ठीक पहले महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर अपने ‘कृपामयी’ पैâसले से हलचल मचा दी है। राज्य में उप जिलाधिकारी पद पर एक भी रिक्त जगह न होते हुए भी सरकार ने १५० तहसीलदारों पर पदोन्नति की बरसात कर दी है। राजस्व विभाग में जारी इस प्रक्रिया ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सेवा संतुलन नियमों को भी ठेंगा दिखाने का आरोप सरकार पर लग रहा है। कुल मिलाकर रिक्त पद शून्य हैं, लेकिन महायुति सरकार की मेहरबानी अपार है। ऐसे में अब यह पूरा मामला निर्वाचन आयोग की मंजूरी पर टिका है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में उप जिलाधिकारी संवर्ग के कुल ६०० पद हैं। इनमें से ३०० पद महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की सीधी भर्ती से भरे जाते हैं, जबकि ३०० पद तहसीलदारों की पदोन्नति से भरे जाते हैं। सेवा प्रवेश नियमों के अनुसार यह ५०-५० का संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी हैं। कोटे के अनुसार जैसे-जैसे पद खाली होते हैं, वैसे-वैसे उनकी भर्ती की जाती है। वर्तमान में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग कोटे से भरे जाने वाले ५८ उप जिलाधिकारी पद रिक्त हैं, लेकिन राज्य सरकार की ओर से समय पर मांग नहीं भेजे जाने के कारण फिलहाल इनकी भर्ती संभव नहीं है। दूसरी ओर तहसीलदार से उप जिलाधिकारी पद पर प्रमोशन के लिए सेवा वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देना आवश्यक होता है। साथ ही उस कोटे में पद रिक्त होना भी जरूरी है। फिलहाल, प्रमोशन कोटे के कोई पद रिक्त नहीं हैं, फिर भी १५० तहसीलदारों को उपजिलाधिकारी पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया जारी है। नियमों के अनुसार केवल रिक्त पद पर ही पदोन्नति दी जा सकती है।
चुनाव के कारण प्रमोशन जरूरी
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के कारण यह प्रमोशन देना आवश्यक बताया गया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार चुनाव नियमों के तहत नामांकन पत्र दाखिल करते समय जिस अधिकारी को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया जाता है, उसी अधिकारी के हस्ताक्षर से चुनाव परिणाम घोषित किया जाना चाहिए। इसलिए इन अधिकारियों को प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रमोशन देना जरूरी है। अन्यथा जो अधिकारी प्रमोशन के योग्य हैं, उन्हें पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक इंतजार करना पड़ेगा।
