द्रुप्ति झा / मुंबई
ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच मुंबई पुलिस ने एक ऐसी आपराधिक चाल का पर्दाफाश किया है जिसने ई-कॉमर्स कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को सतर्क कर दिया है। मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट-8 ने एक अंतरराज्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया है जो देशभर की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों को ठगने के लिए अत्यंत सुनियोजित तरीके से बारकोड बदलने की चाल चल रहा था। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर दो उत्पादों—एक महंगे और एक सस्ते—का अलग-अलग ऑर्डर देता था। जब ये उत्पाद डिलीवरी के लिए पहुंचते, तो आरोपी डिलीवरी बॉय से मिलीभगत कर दोनों पार्सलों के बारकोड आपस में बदल देते थे। वे महंगे उत्पाद के बॉक्स से बारकोड स्टिकर निकालकर उसे सस्ते सामान के बॉक्स पर चिपका देते थे और सस्ते उत्पाद का बारकोड महंगे बॉक्स पर लगा देते थे। इस तरह से जब वे महंगे सामान को अस्वीकार कर रिटर्न करते, तो वास्तव में सस्ते उत्पाद का बॉक्स ई-कॉमर्स कंपनी को वापस भेजा जाता और महंगा उत्पाद अपने पास रख लिया जाता था। इसके बाद कंपनी की प्रणाली में बारकोड के कारण यह दिखता कि महंगा उत्पाद लौटा दिया गया है, जिसके बदले में आरोपी रिफंड प्राप्त कर लेते थे। यह पूरी प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित थी कि सामान्य जांच में यह ठगी पकड़ में नहीं आती थी।
मुंबई क्राइम ब्रांच को सोमवार को विशेष सूचना मिली कि यह गिरोह बोरीवली पश्चिम के चंदावरकर मार्ग स्थित रिलायंस डिजिटल स्टोर के सामने महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की डिलीवरी लेने पहुंचने वाला है। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच यूनिट-8 ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक जाल बिछाया और मौके पर चार आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 45 लाख 9 हजार 333 रुपये मूल्य का माल जब्त किया है, जिसमें से 34 लाख रुपये से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा, कार्रवाई के दौरान टाटा ऐस कंपनी का एक टेम्पो, जिसकी अनुमानित कीमत सात लाख रुपये है, और हुंडई कंपनी की एक क्रेटा कार, जिसकी कीमत लगभग चार लाख रुपये बताई जा रही है, भी जब्त की गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और लंबे समय से विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा था। आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों और पतों का उपयोग कर फर्जी ऑर्डर देते थे ताकि किसी एक क्षेत्र में संदेह उत्पन्न न हो। पुलिस अब गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और उनके नेटवर्क की जांच कर रही है। गिरफ्तार चारों आरोपियों को बोरीवली पुलिस स्टेशन में दर्ज केस नंबर 89/2025 के तहत भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में आरोपित किया गया है। उन्हें माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, 37वीं अदालत, किला कोर्ट, मुंबई के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन फोरम्स के माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क में रहते थे और नकली रिटर्न प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा करते थे। इस प्रकार की ठगी से न केवल कंपनियों को आर्थिक नुकसान होता है बल्कि उपभोक्ताओं के भरोसे पर भी असर पड़ता है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने ई-कॉमर्स कंपनियों को सलाह दी है कि वे अपने लॉजिस्टिक सिस्टम में बारकोड ट्रैकिंग और रिटर्न सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करें ताकि ऐसे अपराधों को दोहराया न जा सके।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि ऑनलाइन खरीदारी के युग में जहां सुविधा बढ़ी है, वहीं धोखाधड़ी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों के लिए यह जरूरी है कि वे डिजिटल लेन-देन और उत्पादों की डिलीवरी प्रक्रिया में सतर्कता बरतें। पुलिस की यह सटीक कार्रवाई न केवल मुंबई बल्कि देशभर की एजेंसियों के लिए एक मिसाल बन सकती है, जिससे भविष्य में ऐसे संगठित साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
