सुनील ओसवाल / मुंबई
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गढ़ माने जानेवाले नागपुर में जेल प्रशासन के सामने बड़ा चौंकानेवाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, जेल के ४० बंदियों ने पैरोल पाने के लिए बनावट मेडिकल सर्टिफिकेट का सहारा लिया।
धंतोली पुलिस ने इस मामले में ४० बंदियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला जेल रक्षक मयूर राजेश्वर नागपुरे की शिकायत के बाद उजागर हुआ। इतिहास में यह पहली बार है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बंदियों के खिलाफ इस प्रकार का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, जेल में बंदियों को संचित रचना और अभिवचन रजा (पैरोल) मिलने का प्रावधान है। जनवरी से जून के बीच बंदियों ने नाते-रिश्तेदारों की बीमारी का हवाला देकर पैरोल के लिए आवेदन किए। इतने बड़े पैमाने पर समान कारण से पेरोल की मांग देखी जाने पर जेल अधीक्षक नितीन क्षीरसागर ने सभी आवेदन उप महानिरीक्षक को जांच के लिए भेजे और पुलिस से भी रिपोर्ट मांगी। जांच के दौरान, उप महानिरीक्षक ने मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से सभी सर्टिफिकेट की सत्यता की पुष्टि करवाई। जांच में पाया गया कि सभी मेडिकल सर्टिफिकेट में दी गई जानकारी गलत थी और मेडिकल अधिकारी इस तरह के मामलों में रोग का निदान नहीं करते हैं। इसके बाद ४० बंदियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
उच्च न्यायालय की जांच में खुलासा
एक बंदी के पैरोल आवेदन को उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने जेल प्रशासन से पूछा कि रजा क्यों नामंजूर की गई। जेल प्रशासन ने बताया कि बंदियों ने बनावटी मेडिकल सर्टिफिकेट के सहारे पैरोल पाने का प्रयास किया। जांच में यह भी सामने आया कि अन्य कई बंदियों ने भी यही तरीका अपनाया था।
पहली बार ऐसा मामला
जेल में ४० बंदियों के खिलाफ एक साथ केस दर्ज होने की यह पहली घटना है।
जांच में यह भी पता चला कि इनमें उम्रकैद और सश्रम कारावास की सजा भुगत रहे बंदी भी शामिल हैं। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अनामिका मिर्झापुरे के मार्गदर्शन में इस मामले की जांच जारी है।
