राम सातपुते ने लगाई बोली,
सीएम से कराई थी गुप्त मीटिंग
विजयसिंह मोहिते पाटील बोले, ‘मैं बिकने वालों में से नहीं’
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में करोड़ों की कथित ‘डील’ का मुद्दा ज्वालामुखी बनकर फूटा है। मालशिरस और सोलापुर की स्थानीय निकाय के चुनावों की पृष्ठभूमि में आरोपों का ताप इतना बढ़ चुका है कि पूरे प्रदेश में हलचल मच गई है। राकांपा नेता व पूर्व सांसद विजयसिंह मोहिते पाटील ने एक सार्वजनिक मंच से एक ऐसा धमाका कर दिया, जिसने न सिर्फ भाजपा उम्मीदवार राम सातपुते की मुश्किलें बढ़ा दीं, बल्कि सत्ता पक्ष के शीर्ष नेतृत्व तक सवालों की लपटें पहुंच गई थीं। पाटील के अनुसार, विधानसभा चुनाव में ‘अंदर से साथ’ देने के बदले सातपुते ने पहले ३५ करोड़ और बाद में प्रस्ताव बढ़ाकर ५० करोड़ रुपए तक का ऑफर दिया था। इस सौदेबाजी को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गुप्त मुलाकात तक कराई गई थी। उन्होंने यह दावा भी किया कि चुनावी दबाव, सौदे और प्रलोभनों के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों और वादों से समझौता नहीं किया, क्योंकि मैं बिकने वालों में से नहीं।
अकलूज की संगता सभा में बोलते हुए विजयसिंह मोहिते पाटील ने राम सातपुते पर ये गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, इसके बाद उन्होंने कहा कि मैं वापस आ गया। मैं एक बार दिया हुआ वादा नहीं बदलता। फिर चुनाव से चार दिन पहले यह प्रस्ताव पूरे ५० करोड़ तक पहुंच गया था। अकलूज के विजय चौक में वरिष्ठ नेता विजयसिंह मोहिते पाटील की उपस्थिति में प्रचार की समापन सभा संपन्न हुई। इस दौरान राकांपा के सांसद धैर्यशील मोहिते पाटील, विधायक उत्तम जानकर और महबूब शेख मौजूद थे।
हार निश्चित है
मैंने राम सातपुते से कहा था कि तुम्हें सोलापुर से खड़े नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि सोलापुर लोकसभा क्षेत्र में विजयदादा को मानने वाले ८० हजार से अधिक मतदाता हैं। यदि तुम दादा के साथ विश्वासघात करके वहां गए तो हार निश्चित है। लेकिन सातपुते ने मेरी बात नहीं सुनी। सोलापुर के बाद मालशिरस में भी खड़े मत हो, फिर से हारोगे’, यह भी मैंने सातपुते से कहा था।
इसलिए ठुकराया ऑफर
लोकसभा चुनाव में धैर्यशील मोहिते पाटील और उत्तम जानकर हमारे पास आए थे। इस बार मैंने जानकर को चुनाव जिताने का वादा किया था और उसे निभाने के लिए मैंने वह प्रस्ताव ठुकरा दिया, लेकिन वादा नहीं तोड़ा।
