मुख्यपृष्ठनए समाचारमीरा-भायंदर में ‘मुलशी पॅटर्न’ का रियल लाइफ खेल!

मीरा-भायंदर में ‘मुलशी पॅटर्न’ का रियल लाइफ खेल!

-बुलडोजर बना जमीन हथियाने का हथियार
-भूमिपुत्रों-आदिवासियों के घरों पर तोड़क कार्रवाई
-बड़े निर्माणों पर ‘मेहरबानी’ का आरोप

सुरेश गोलानी

मुलशी तालुका में हुए वास्तविक जमीन विवादों, भूमिपुत्रों और आदिवासी समुदाय के साथ होने वाले अन्याय पर आधारित मराठी फिल्म ‘मुलशी पैटर्न’ का रियल लाइफ संस्करण मीरा-भायंदर में देखने को मिल रहा है। आरोप है कि मीरा-भयंदर आजादी से पहले से रह रहे भूमिपुत्र, आदिवासी और मराठी परिवारों के घरों पर मीरा-भायंदर महानगरपालिका प्रशासन द्वारा सत्ताधारी भाजपा के दबाव में बुलडोजर चलाकर बेघर करने का षड्यंत्र चल रहा है। ताजा मामले में भायंदर के पास स्थित मुर्धा गांव में एक भूस्वामी के घर पर मनपा द्वारा १०० से ज्यादा पुलिसकर्मियों के बंदोबस्त के बीच अमानवीय तरीके से और कानूनी मानदंडों का उल्लंघन करते हुए जमींदोज कर दिया गया। घर में १४ साल की बीमार बच्ची होने के बावजूद पूरे परिवार को पुलिस स्टेशन ले जाना और विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के खिलाफ मामले दर्ज करके मनपा ने दमन की सारी हदें पार करने के आरोप लग रहे है।
गौरतलब है कि हाल ही में जमींदोज किए गए मकान से कुछ ही मीटर दूर स्थित एक बहुमंजिला होटल के अवैध निर्माण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए भाजपा नगरसेवक जयेश भोईर ने नारों से छपी ‘फ्लेक्स’ जैकेट पहनकर मनपा की जनरल बॉडी मीटिंग में पहुंचे और आकर्षण का केंद्र बनते हुए सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। हालांकि इस निर्माण कार्य पर मनपा द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई और होटल मालिक को कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका दे दिया।
राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते मनपा प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम को बेहद भेदभावपूर्ण बताते हुए शिंदे गुट के मंत्री प्रताप सरनाईक ने आरोप लगाया कि भूमिपुत्रों पर दबाव बनाकर उनकी पुश्तैनी जमीन हथियाने के उद्देश्य से इस तोड़क कार्यवाही को अंजाम दिया गया। जैसे-जैसे शहर का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आसपास के गांवों की जमीनों की मांग तेजी से बढ़ी है और उनके भाव आसमान छूने लगे हैं। टाउनशिप और अन्य प्रोजेक्ट्स विकसित करने के लिए कई बड़े डेवलपर्स स्थानीय राजनेताओं के आशीर्वाद और समर्थन के दम पर भूमिपुत्रों और आदिवासी समुदाय से कम दामों में बड़े लैंड बैंक हासिल करने में जुटे हैं। मालिक माना तो ठीक, नहीं तो कार्रवाई का दबाव बनाकर जमीन बेचने को मजबूर किया जाता है। मनपा पर सत्ता हासिल करने के बाद भाजपा ने अवैध निर्माण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का दावा किया, लेकिन शहर में भारी संख्या में अनधिकृत निर्माण और तोड़क कार्रवाई में कथित भेदभाव ने इस नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीन की कीमत बढ़ी, भूमिपुत्रों पर बढ़ा दबाव?
मीरा-भायंदर में गांवों की जमीनों के बढ़ते दाम के बीच भूमिपुत्रों और आदिवासियों पर कथित दबाव के आरोप गंभीर हैं। सवाल यह है कि क्या तोड़क कार्रवाई कानून लागू करने की मुहिम है या महंगी जमीनों पर कब्जे का रास्ता साफ करने की कोशिश?

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