-हड़पे हुए मैदान छोड़े नहीं तो मनपा मुख्यालय के सामने करेंगे आंदोलन, हटेंगे नहीं
सामना संवाददाता / मुंबई
महानगर मुंबई में भाजपा नेतृत्ववाली महायुति सरकार द्वारा भूखंड कौड़ियों के दाम पर अपने चहेते बिल्डरों, नेताओं व विधायकों को दिए जाने के विरोध में शिवसेना की ओर से ‘मैदान बचाओ’ आंदोलन शुरू किया गया है। खुले मैदानों को बचाने के लिए बांद्रा में विराट तिरंगा आंदोलन में संबोधन के दौरान शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने भाजपा पर जोरदार हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा मुंबई के खुले मैदानों को हड़पने की तैयारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि मुंबई के मैदान केवल जमीन के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि बच्चों और युवाओं के भविष्य से जुड़े हुए हैं। बांद्रा स्थित नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान में तिरंगा आंदोलन में विपक्ष के तमाम राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता एवं हजारों सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ आदित्य ठाकरे ने राज्य की भाजपा नेतृत्ववाली महायुति सरकार को रेडकार्ड दिखाया और कहा कि हम भाजपा के इस नापाक मंसूबों को पूरा नहीं होने देंगे।
इस दौरान आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि वे कहते हैं कि जेन-जी को स्क्रीन से मैदान में जाना चाहिए। लेकिन आपने मैदान छोड़े ही कहां, मुंबई के ज्यादातर ग्राउंड अपने चहेते बिल्डरों, नेताओं और विधायकों को गिफ्ट के तौर पर दे रहे हैं।
खुले मैदान बचाने के लिए उतरे हजारों मुंबईकर
मुंबई के खेल मैदानों और खुले भूखंडों को भाजपा अपने चहेते बिल्डरों, ठेकेदारों और विधायकों के हवाले कर रही है। इसके विरोध में कल हजारों मुंबईकरों ने बांद्रा में विराट तिरंगा आंदोलन किया। बांद्रा के नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान पर हुए इस आंदोलन में मुंबईकरों ने भाजपा को ‘रेड कार्ड’ दिखाते हुए चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में खेल मैदानों को हड़पने नहीं दिया जाएगा।
शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे की प्रमुख उपस्थिति में यह तिरंगा आंदोलन किया गया। आंदोलन में मुंबईकरों के साथ फुटबॉल प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थी, उनके अभिभावक, फुटबॉल प्रशिक्षक, वर्तमान एवं पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी, रेफरी, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता और नागरिक हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए। इस दौरान आदित्य ठाकरे सहित प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहनकर भाजपा के कथित काले कारनामों का विरोध दर्ज कराया। आदित्य ठाकरे ने इस आंदोलन को संबोधित करते हुए भूखंडों को हड़पने में जुटी महायुति सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि २०१७ में जब वर्ष २०३४ का विकास आराखड़ा तैयार हुआ था, तब शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट रुख अपनाया था कि मुंबई का एक भी मैदान बिल्डर या ठेकेदार को नहीं दिया जाएगा। वर्ष २०१९ में महाविकास आघाड़ी की सरकार बनने के बाद भी उन्होंने निर्देश दिए थे कि मुंबई के मैदान जैसे हैं, वैसे ही बने रहने चाहिए। लेकिन पिछले चार वर्षों में मुंबई बदलने लगी है। पिछले ही सप्ताह सरकार ने १७ मैदानों के आरक्षण में बदलाव कर वहां आवासीय, व्यावसायिक इमारतें या प्रदर्शनी केंद्र बनाने की तैयारी की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रंगशारदा को भी आज नोटिस जारी किया गया है और उसे भी हड़पने की कोशिश चल रही है।
नेविल डिसूजा मैदान को बचाएं
बांद्रा में रंगशारदा के पास स्थित मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन के नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान में सैकड़ों खिलाड़ी फुटबॉल का प्रशिक्षण लेते हैं। मुंबई में फुटबॉल प्रशिक्षण के लिए बचे प्रमुख मैदानों में से एक इस मैदान को म्हाडा और महानगरपालिका द्वारा कन्वेंशन सेंटर के लिए देने की तैयारी किए जाने का आरोप है।
जेन-जी और जेन-अल्फा भी आंदोलन में उतरे
इस आंदोलन में जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के युवक-युवतियों तथा बच्चों के बड़ी संख्या में शामिल होने की जानकारी मिलने के बाद मैदान और रंगशारदा परिसर में भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया था। आंदोलन के दौरान देशभक्ति गीत ‘मां तुझे सलाम’ पर सभी ने तिरंगा लहराते हुए उत्साह व्यक्त किया।
एक ही मैदान बचा है, इसे बचाना जरूरी : हेनरी फुकाडा
हिंदुस्थान के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हेनरी फुकाडा ने कहा कि वह वर्ष १९९४ से फुटबॉल खेल रहे हैं और १९९८ से देश के लिए खेलते रहे हैं। उनके समय में मुंबई में कई मैदान हुआ करते थे, लेकिन आज नेविल डिसूजा मैदान ही बचा है। इसलिए इसे बचाना बेहद महत्वपूर्ण है।
बच्चों का सपना मत छीनिए : भूमिका
फुटबॉल खिलाड़ी भूमिका माने ने कहा कि फुटबॉल मैदान बचाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एकजुट देखकर खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को खिलाड़ियों से मैदान नहीं छीनना चाहिए और बच्चों के खेलने का सपना भी नहीं छीनना चाहिए।
‘यह मैदान हमें हर हाल में चाहिए’ : यूसुफ अंसारी
नेविल डिसूजा मैदान भी चला गया तो फुटबॉलर बनने का सपना देख रहे बच्चों का भविष्य क्या होगा, यह सवाल हिंदुस्थान के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी यूसुफ अंसारी ने उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में यह मैदान हमें चाहिए ही। यह हमारा मैदान है और यही हिंदुस्थान का भविष्य है।
फुटबॉलर कैसे तैयार होंगे? : पाठक
महाराष्ट्र की अंडर-१४ फुटबॉल टीम के प्रशिक्षक जयवंत पाठक ने कहा कि बच्चों का सपना मुंबई, महाराष्ट्र और फिर हिंदुस्थान के लिए खेलना है। मुंबई में करीब ४०० क्लब और १६ हजार खिलाड़ी हैं। ८ से १८ वर्ष तक के विद्यार्थी यहां खेलते हैं। यदि यह मैदान ही चला गया तो इन बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा?
मैदान हड़पने नहीं देंगे : रेहबर खान
कांग्रेस के पूर्व नगरसेवक रेहबर खान ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वे भी इसका विरोध करेंगे और किसी भी कीमत पर मैदान को हड़पने नहीं देंगे।
मुंबईकरों का जज्बा मैदान बचाएगा : नायजेल डिसूजा
नायजेल डिसूजा ने कहा कि मुंबईकरों का यही जज्बा मैदान को बचाएगा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारे लगाए, ‘मैदान हमारे हक का… नहीं किसी के बाप का!’ और ‘कौन कहता है देंगे नहीं… लिए बिना रहेंगे नहीं!’
‘चैन से नहीं बैठेंगे’ : हारून खान
शिवसेना विधायक हारून खान ने कहा कि मुंबईकरों की आवाज कोई दबा नहीं सकता। यदि किसी ने ऐसा प्रयास किया तो मुंबईकर एकजुट होकर उसका विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि हम महाराष्ट्र और मुंबई के लिए एकजुट हुए हैं। जब तक ये मैदान मुंबईकरों के हाथ में वापस नहीं आते, तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे।
दो कन्वेंशन सेंटर पहले से हैं, फिर यहां क्यों? : शहजाद बथेना
शहजाद बथेना ने सवाल उठाया कि फीफा द्वारा बनाए गए १७ नियमों में पहला नियम फुटबॉल मैदान से संबंधित है। उन्होंने कहा, ‘मैदान नहीं तो कुछ भी नहीं, क्योंकि मैदान के बिना फुटबॉल खेला ही नहीं जा सकता।’ इस अवसर पर मैदान से जुड़े जेफ्री सर और कृष्णा बावले ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। आंदोलन के दौरान तेजस ठाकरे, शिवसेना नेता एवं सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई, विधायक अनिल परब, सुनील प्रभु, हारून खान, वरुण सरदेसाई, महेश सावंत, बाला नर, नगरसेविका विशाखा राऊत, सबा हारून खान, शिवसंपर्क सेना के अध्यक्ष अखिल चित्रे, शिवसेना सचिव एवं नगरसेवक साईनाथ दुर्गे, उपनेता विनोद घोसालकर, अरुण दूधवडकर सहित अन्य उपस्थित थे।
मुलुंड, प्रभादेवी, अंधेरी और जुहू में भी आंदोलन
मुंबई के खुले मैदानों को लेकर सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश देने के लिए आदित्य ठाकरे ने न्यायालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि मुंबई के लिए राजनीतिक मतभेद भुलाकर सभी को हाथों में तिरंगा लेकर एकजुट होना पड़ेगा, वरना यह सरकार मुंबई को निगल जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आज आंदोलन की शुरुआत हुई है। इसके बाद मुलुंड, प्रभादेवी, अंधेरी और जुहू सहित मुंबई के अन्य इलाकों में भी आंदोलन किया जाएगा।
