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मोदी के गुजरात में गजब का झोल … एक भी कील लगी नहीं पर ` ८०० करोड़ का हो गया खेल! … डीजीजीआई ने किया खुलासा

एक भी कील इधर से उधर नहीं हुई और कई सौ करोड़ रुपए का खेल हो गया। इस खेल की बदौलत कौड़ियों की कीमत वाले कुछ लोग करोड़पति बन गए। जी हां, गुजरात के अमदाबाद से जुड़े इस मामले का खुलासा डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) ने किया है। डीजीजीआई की जांच में अब तक ८०० करोड़ रुपए की हेराफेरी की बात का पता चला है और कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फर्जी बिलिंग से जुड़ी इस कार्रवाई को इस साल की सबसे बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
तीन अलग-अलग मामलों की जांच के बाद डीजीजीआई को पता चला कि आरोपी नकली कंपनियां बनाते, नकली डायरेक्टर की तैनाती करते और फर्जी बिल बनाकर जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ले लेते थे। असल में न माल आता था, न जाता था, सिर्फ बैंक में पैसा घूमता था और सरकारी खजाने को तगड़ा चूना लग जाता था। पहला मामला अमदाबाद से था, जिसमें करीब ५५० करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग की गई थी। इस मामले में डीजीजीआई ने बदरे आलम पठान और तौफीक खान नाम को मुख्‍य आरोपी के तौर पर अरेस्‍ट किया है।
दोनों आरोपी अमदाबाद में ही एएच इंजीनियरिंग वर्क्स के नाम से एक फर्म चलाते थे। इन दोनों आरोपियों ने मिलकर बंद पड़ी ऐसी दर्जनों कंपनियों के नाम का इस्‍तेमाल किया, जिनका जीएसटी नंबर भी चालू था। पहले इन कंपनियों का पता और डायरेक्‍टर बदले गए, फिर शुरू हुआ फर्जी बिलिंग का गोरखधंधा। ये फर्जी बिल ज्यादातर गुजरात के अमदाबाद, जामनगर, राजकोट के साथ महाराष्‍ट्र की कई पैâक्ट्रियों को दिए गए थे। पैâक्ट्रियों को आयरन और स्‍टील की मैन्युपैâक्चिरिंग से जुड़ा बताया गया था।
डीजीजीआई के अनुसार, पकड़े जाने पर तौफीक ने कबूला कि उसने अकेले ४५ करोड़ के फर्जी बिल के जरिए ८.८६ करोड़ का गलत आईटीसी ले लिया है। इसका एक साथी इकराम खान अभी फरार है। दूसरा केस जूनागढ़ का था। वहां हार्दिक रावल नामक आरोपी को पकड़ा गया है।

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