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महायुति सरकार की साख पर धब्बा … जन्म-मृत्यु के नाम पर महाघोटाला! …अफसरों ने बांटे लाखों फर्जी सर्टिफिकेट

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में महायुति सरकार की साख पर अब काला धब्बा लग गया है। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के नाम पर हुआ यह महाघोटाला सरकार की लापरवाही और अफसरशाही की मिलीभगत का बड़ा सबूत माना जा रहा है। तहसीलदार से नीचे के अफसरों ने अधिकारों का दुरुपयोग कर धड़ाधड़ लाखों की संख्या में फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर दिए। अब जब पूरा मामला उजागर हुआ तो सरकार की साख पर बड़ा धब्बा लगा है। इससे फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग करनेवालों में खलबली मच गई है।

अवैध प्रमाणपत्रों को रद्द करने का आदेश!
कई लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर बनवाए हैं प्रॉपर्टी और वोटर कार्ड

महाराष्ट्र में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का इतना बड़ा जाल पैâला कि अब महायुति सरकार को इन्हें रद्द करने के लिए विशेष मुहिम चलानी पड़ रही है। आरोप लग रहे हैं कि जिन अधिकारियों के पास अधिकार ही नहीं था, उन्होंने तहसीलदार के नाम पर हजारों अवैध प्रमाणपत्र जारी कर डाले। सूत्रों के मुताबिक, इन कागजों के दम पर कई लोगों ने नौकरियों के अलावा योजनाओं, प्रॉपर्टी और वोटर कार्ड का फायदा उठाया है।
फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के नाम पर हुए इस सिस्टमेटिक घोटाले का बोझ जनता को उठाना पड़ रहा है। सरकार को अवैध प्रमाणपत्र रद्द करने की कार्रवाई के आदेश देने पर मजबूर होना पड़ा है। इस संबंध में दो दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने बाकायदा शासनादेश जारी किया है। महायुति सरकार चाहे जितना पर्दा डालने की कोशिश करे, लेकिन यह सच है कि सरकारी खामोशी और मिलीभगत ने ही इस फर्जी साम्राज्य को जन्म दिया। जांच में खुलासा हुआ कि अफसरों ने धड़ल्ले से नकली जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बांटे। ये प्रमाणपत्र न केवल सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के सबूत हैं, बल्कि इन्हीं के जरिए कई अवैध लाभ उठाए गए। ग्रामीण और शहरी इलाकों में इस तरह के हजारों प्रमाणपत्र जारी किए जाने की पुष्टि हो चुकी है। मामला उजागर होते ही सरकार की नींद उड़ गई।

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