सामना संवाददाता / मुंबई
उरण स्थित मोरा बंदरगाह की सुरक्षा प्रशासन की लापरवाही के कारण खतरे में पड़ी हुई दिखाई दे रही है। बताया जाता है कि इस संवेदशील क्षेत्र के जेट्टी पर लगे सभी सातों सीसीटीवी वैâमरे बंद हैं। बार-बार शिकायत करने के बावजूद इन कैमरों की मरम्मत नहीं की जा रही है, जिससे पूरे बंदरगाह की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ऐसे में अगर कोई दुर्घटना होती है तो इसका कौन जिम्मेदार होगा? ऐसा सवाल उरणवासियों ने उठाया है।
गौरतलब हो कि मोरा बंदरगाह के क्षेत्र में जेएनपीए, ओएनजीसी, बीपीसीएल, जीटीपीएस जैसी कई परियोजनाएं हैं और सीसीटीवी वैâमरे न होने से वहां की सुरक्षा भी खतरे में है। उरण का मोरा बंदरगाह समुद्री परिवहन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्यभर और गुजरात से हजारों मछली पकड़ने वाली नावें भी इस बंदरगाह पर आती-जाती हैं। इस वजह से डीजल तस्कर भी एक बड़ी समस्या बन गए हैं।
अधिकारियों की शिकायत का भी असर नहीं
प्रशासन ने आतंकवादी गतिविधियों, डीजल तस्करी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जेट्टी पर सात सीसीटीवी वैâमरे लगाए थे, लेकिन इसके बंद होने के बाद से बंदरगाह की सुरक्षा का खतरा उत्पन्न हो गया है। मोरा बंदरगाह के अधिकारियों ने इस संबंध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को एक लिखित पत्र भी भेजा है, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
