मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स: पूरे यूरोप को ले डूबा इटली का ‘जोकर'!

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स: पूरे यूरोप को ले डूबा इटली का ‘जोकर’!

श्रीकिशोर शाही

(बुंगा बुंगा-२२)

साल २०११ आ चुका था। एक तरफ इटली का प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी मिलान की अदालतों में अपने सेक्स स्वैंâडल और गवाहों को खरीदने के मामलों में अपनी गर्दन बचाने की जद्दोजहद कर रहा था और दूसरी तरफ पूरा इटली एक भयंकर आर्थिक तबाही के मुहाने पर खड़ा था। यूरोप भयंकर ऋण संकट से गुजर रहा था और इटली की अर्थव्यवस्था दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुकी थी।
पूरे देश का शेयर बाजार औंधे मुंह गिर रहा था और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का इटली से भरोसा पूरी तरह उठ चुका था। यूरोपियन यूनियन और यूरोपियन सेंट्रल बैंक की तरफ से इटली पर भारी दबाव डाला जा रहा था कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारे, लेकिन देश के प्रधानमंत्री के पास इन गंभीर मुद्दों के लिए कोई समय नहीं था। बर्लुस्कोनी की पूरी ऊर्जा अपने निजी मुकदमों और वकीलों के साथ बैठकों में खर्च हो रही थी। दुनिया भर के अखबारों ने लिखना शुरू कर दिया था कि इटली का ‘जोकर’ प्रधानमंत्री पूरे यूरोप को ले डूबेगा।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव, सहयोगी दलों की बगावत और सड़कों पर उतर चुकी जनता के आक्रोश के आगे बर्लुस्कोनी का अजेय किला आखिरकार ढह गया। १२ नवंबर २०११ को बेबस और थके हुए सिल्वियो बर्लुस्कोनी को भारी मन से अपने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। जब वह इस्तीफा देने के लिए रोम के राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो बाहर हजारों की भीड़ खड़ी थी जो ‘चोर-चोर’ और ‘जेल जाओ’ के नारे लगा रही थी। लोगों ने सड़कों पर शैंपेन की बोतलें खोलकर ऐसे जश्न मनाया, मानो किसी क्रूर तानाशाह का अंत हुआ हो। इटली के इतिहास के सबसे ताकतवर राजनेता की यह अब तक की सबसे अपमानजनक और खौफनाक विदाई थी।

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