-जब्तियां बढ़ीं लेकिन नेटवर्क अब भी बरकरार
सामना संवाददाता / मुंबई
गोरेगांव में तीन करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की ७५० ग्राम हेरोइन के साथ उत्तराखंड के २० वर्षीय युवक की गिरफ्तारी ने एक बार फिर मुंबई में फैलते नशीले पदार्थों के नेटवर्क की गंभीरता उजागर कर दी है। पुलिस को संदेह है कि गिरफ्तार युवक इस गिरोह का मुख्य संचालक नहीं, बल्कि मादक पदार्थ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया एक ‘वैâरियर’ था। असली सवाल यही है कि उसे हेरोइन किसने दी, मुंबई में खेप किसे पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे सक्रिय मुख्य तस्कर कहां हैं?
शहर में आए दिन हेरोइन, मेफेड्रोन यानी एमडी, कोकीन, गांजा और सिंथेटिक ड्रग्स की छोटी-बड़ी खेप पकड़ी जा रही हैं। वर्ष २०२५ में मुंबई पुलिस ने ८१४ करोड़ रुपए से अधिक के नशीले पदार्थ जब्त किए और हजारों मामले दर्ज किए। वर्ष २०२६ के पहले तीन महीनों में ही १,३३२ एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और ३७ करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ पकड़े गए। इतनी बड़ी बरामदगी पुलिस की सक्रियता दिखाती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि शहर में नशे की आपूर्ति और मांग कितने बड़े स्तर पर मौजूद है।
मुंबई की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति तस्करों के लिए अनुकूल बनती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, समुद्री बंदरगाह, उपनगरीय रेल नेटवर्क और दूसरे राज्यों से जुड़ी सड़कें तस्करी के अनेक रास्ते उपलब्ध कराती हैं। मई २०२६ में मुंबई हवाई अड्डे पर दो यात्रियों के शरीर से करीब सात करोड़ रुपये की १.४० किलोग्राम कोकीन बरामद हुई थी। तस्कर अब गरीब युवाओं, महिलाओं और पहली बार यात्रा करने वाले लोगों को थोड़े पैसों का लालच देकर वैâरियर बना रहे हैं। इसके साथ ही सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता कारोबार अधिक चिंताजनक है। इन्हें छोटे कमरों और गुप्त प्रयोगशालाओं में बनाया जा सकता है तथा सोशल मीडिया, कोड वर्ड, ऑनलाइन भुगतान और होम डिलीवरी के जरिए बेचा जाता है। इस कारण पारंपरिक पुलिस निगरानी कमजोर पड़ जाती है। पुलिस अक्सर अंतिम छोर पर खड़े छोटे सप्लायर या उपभोक्ता को पकड़ती है, लेकिन नेटवर्क के वित्तपोषक, निर्माता और बड़े वितरक बच निकलते हैं।
केवल जब्ती के आंकड़ों को सफलता बताना पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि बड़ी बरामदगियों में कितने सरगना पकड़े गए, कितनी संपत्तियां जब्त हुईं और कितने मामलों में दोषसिद्धि हुई।
देश में पकड़ी गई ५८ प्रतिशत हेरोइन अकेले पंजाब से
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की वर्ष २०२५ की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में जब्त ३,५६७ किलोग्राम हेरोइन में से २,०८६ किलोग्राम पंजाब में पकड़ी गई। रिपोर्ट में पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान मार्ग से तस्करी और दवाओं के नशे के रूप में दुरुपयोग को बढ़ती चुनौती बताया गया है।
