नई दिल्ली। मौजूदा टी-२० विश्व विजेता भारत का आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम से ३४ रन से हारना क्रिकेट जगत के लिए बड़ा उलटफेर है। बेलफास्ट में खेले गए मुकाबले में आयरलैंड ने नौ विकेट पर १८२ रन बनाए, जबकि मजबूत बल्लेबाजी क्रम वाली भारतीय टीम १८.५ ओवर में केवल १४८ रन पर सिमट गई। यह अंतर केवल हार नहीं, बल्कि भारतीय टीम की रणनीति, चयन और मानसिक तैयारी पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। आयरलैंड ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार भारत को हराया। वह भी ऐसी स्थिति में, जब मेजबान टीम अपने कई प्रमुख तेज गेंदबाजों के बिना उतरी थी। इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाज परिस्थितियों को समझने, शुरुआती दबाव झेलने और लक्ष्य का पीछा करने में असफल रहे। एक पदार्पण करने वाले आयरिश गेंदबाज ने तीन विकेट लेकर विश्व विजेता बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। ऐसे परिणामों के बाद स्वाभाविक रूप से सट्टा बाजार और मैच की शुचिता को लेकर संदेह पैदा होते हैं, लेकिन संदेह और प्रमाण में अंतर होता है। किसी मैच को फिक्स बताने के लिए असामान्य सट्टेबाजी पैटर्न, खिलाड़ियों अथवा अधिकारियों से संदिग्ध संपर्क, अचानक भारी धनराशि का दांव, जानबूझकर की गई असामान्य गलतियां या भ्रष्टाचार-रोधी इकाई की ठोस रिपोर्ट आवश्यक होती है। फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुआ है। फिर भी बीसीसीआई को इस हार को केवल ‘खराब दिन’ बताकर आगे नहीं बढ़ जाना चाहिए।
मैच फिक्सिंग की बू!
आईसीसी की भ्रष्टाचार-रोधी इकाई प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय मैच में सट्टेबाजी से जुड़े संकेतों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती है। यदि इस मुकाबले में दांव की मात्रा, ऑड्स के अचानक बदलाव या किसी खिलाड़ी से संदिग्ध संपर्क का संकेत मिला हो, तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
