मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है : चलती-फिरती हिंसा!

गजबे है : चलती-फिरती हिंसा!

उमा सिंह

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह समाज का आईना भी बन चुका है। हर दिन हजारों वीडियो वायरल होते हैं, कुछ हमें प्रेरित करते हैं तो कुछ हमें झकझोर कर सोचने पर मजबूर कर देते हैं। हाल ही में सामने आया एक वीडियो इसी दूसरी श्रेणी में आता है, जिसने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो में एक साधारण-सी दिखने वाली बाइक यात्रा अचानक भयावह मोड़ ले लेती है। एक व्यक्ति बाइक चला रहा होता है और उसके पीछे एक महिला बैठी होती है। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन कुछ ही क्षणों में वह व्यक्ति चलते वाहन पर ही महिला के साथ मारपीट करने लगता है। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति पर गहरी चिंता भी पैदा करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह घटना सार्वजनिक स्थान पर हो रही है, जहां लोग मौजूद हो सकते हैं, जहां कानून का डर होना चाहिए। इसके बावजूद इस तरह की हिंसा का खुलेआम होना यह दर्शाता है कि महिलाओं के प्रति असम्मान और हिंसा की मानसिकता कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है। बल्कि एक चेतावनी है, जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारी सड़कें, हमारे सार्वजनिक स्थान वास्तव में महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं? क्या हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं, जहां हिंसा सामान्य होती जा रही है?
महिलाओं के खिलाफ हिंसा कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ऐसे मामलों का सामने आना यह स्पष्ट करता है कि अब इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जरूरत है कड़े कानूनों के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन की। साथ ही, समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की भी उतनी ही आवश्यकता है। जब तक हम अपनी सोच और व्यवहार में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक ऐसे वीडियो केवल खबर बनकर रह जाएंगे और हकीकत नहीं बदल पाएगी।

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