-अंकल सैम ने दिया अजीब तर्क
रूस के साथ तेल खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति आवास व्हाइट हाउस में ट्रंप के बिजनेस एडवाइजर पीटर नवारो ने एक बार फिर से भारत पर निशाना साधा है। इस बार उन्होंने भारत पर निशाना साधने के लिए जातिसूचक शब्द ‘ब्राह्मण’ शब्द का इस्तेमाल किया है। नवारो ने कहा कि ब्राह्मण भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं और इसे रोकने की जरूरत है। नवारो के बयान पर अब भारत में बहस छिड़ गई है।
नवारो के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेता और राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। पोस्ट में उन्होंने कहा है कि बोस्टन ब्राह्मण शब्द कभी अमेरिका में न्यू इंग्लैंड के धनी वर्ग (एलीट क्लास) के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द था। ब्राह्मण आज भी अंग्रेजी भाषी दुनिया में सामाजिक या आर्थिक ‘एलीट क्लास’ को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एक्स पर निरक्षरता आश्चर्यजनक है।
सागरिका घोष के बयान पर बीजेपी नेता और सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार किया। एक्स पर पोस्ट में दुबे ने कहा कि नक्सलवाद शब्द ‘बोस्टन ब्राह्मण’ ओलिवर वेंडेल होम्स सीनियर ने अपने १८६१ के उपन्यास एल्सी वेनर में गढ़ा था, जिसमें उन्होंने इन प्रभावशाली परिवारों की तुलना भारत की सर्वोच्च पुरोहित जाति से की थी। ये अपनी बौद्धिकता, परोपकार, नागरिक कर्तव्य और विशिष्टता, अपनी शक्ति के लिए जाने जाते हैं।
नवारो ने क्या कहा है?
रूस से तेल खरीदने को लेकर नवारो ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा, भारतीय जनता कृपया समझिए कि यहां क्या हो रहा है। आपके पास ब्राह्मण हैं, जो भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। हमें इसे रोकने की जरूरत है। नवारो ने एक इंटरव्यू में कहा कि देखिए पीएम मोदी एक महान नेता हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नेता हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि भारतीय नेता किस तरह से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सहयोग कर रहे हैं।
