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उत्तर की बात: `२८ लाख नहीं चुका पाई सरकार सचिवालय का सिस्टम ठप!

रोहित माहेश्वरी लखनऊ

-`२८ लाख नहीं चुका पाई सरकार सचिवालय का सिस्टम ठप!
उत्तर प्रदेश सचिवालय में सीयूजी मोबाइल नंबर बदलने का मामला अब प्रशासनिक अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। मोबाइल कंपनी का अनुबंध खत्म होने और करीब २८ लाख रुपए का भुगतान लंबित रहने के कारण पुराने नंबर दूसरी कंपनी में पोर्ट नहीं हो सके। अब नए नंबर जारी करने की तैयारी है, जिसका कर्मचारी संगठन विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों पुराने नंबर बदलने से सरकारी कामकाज और जरूरी संपर्क प्रभावित होंगे। यह मामला सिर्फ मोबाइल नंबरों का नहीं, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में वित्तीय अनुशासन, समन्वय और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। सुशासन के दावों के बीच ऐसी लापरवाही गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
वोट बैंक बचाने के लिए प्रधानों को नई शक्ति?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उन्हें प्रशासक बनाए जाने का पैâसला अब विवादों में है। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की वैधता तय समय तक ही होती है, इसलिए पुराने प्रधानों को प्रशासनिक अधिकार देना संवैधानिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। सरकार इसे विकास कार्यों की निरंतरता बता रही है, जबकि विपक्ष इसे पंचायत चुनावों से पहले ग्राम प्रधानों को राजनीतिक लाभ देने की रणनीति मान रहा है। ग्रामीण वोट बैंक पर प्रधानों के प्रभाव को देखते हुए यह फैसला चुनावी ‘राजनीतिक कीमत’ चुकाने जैसा माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव टलने का समाधान क्या पुराने प्रतिनिधियों को नई शक्तियां देना है?
गांव-गांव गूंज रही गौ रक्षा की हुंकार
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ‘गविष्ठि गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ उत्तर प्रदेश में तेजी से जनसमर्थन जुटा रही है। गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर निकली यह यात्रा अब धार्मिक के साथ राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। गोरखपुर से शुरू हुई यात्रा कई जिलों से गुजरते हुए बुंदेलखंड की ओर बढ़ चुकी है। जगह-जगह हजारों लोग स्वागत में जुट रहे हैं। शंकराचार्य ने साफ कहा है कि २०२७ चुनाव में वही दल समर्थन पाएगा, जो गौ रक्षा पर स्पष्ट रुख अपनाएगा। इससे राजनीतिक गलियारों में भी हलचल और दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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