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उपहार गृह बंद होने से बेस्ट कर्मचारी परेशान!.. प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

संदीप पांडेय / मुंबई

मुंबई की दूसरी लाइफ लाइन के रूप में मशहूर बेस्ट का सहारा मुंबईकरों को अकसर मिलता रहता है, फिर चाहे वो २६ जुलाई की बाढ़ हो, बम विस्फोट हो या कोरोना महामारी। लेकिन पिछले कुछ सालों से मुंबई की दूसरी लाइफ लाइन बेस्ट की पहचान बदल रही है। बसों की संख्या में दिन-ब-दिन कमी होने के कारण लोगों को समय पर बसें नहीं मिल पा रही हैं। इसके साथ ही बेस्ट कर्मचारियों की संख्या भी लगातार कम होती जा रही है। ४८,००० बेस्ट कर्मचारियों की संख्या वाले बेस्ट में अब कुल कर्मचारियों की संख्या २५,००० के आसपास आ गई है।
बेस्ट के पास लगभग २८ डेपो और बहुत सारे बस टर्मिनस हैं, जहां से बसों का संचालन होता है। बेस्ट डेपो और बेस्ट टर्मिनस पर बेस्ट कर्मचारियों के लिए सस्ते में उपहार गृह की व्ययस्था थी, लेकिन बेस्ट प्रशासन द्वारा नियमों में बदलाव किए जाने के कारण अब कर्मचारियों के लिए उपलब्ध उपहार गृह या तो बंद हो गए या फिर महंगे हो गए हैं। बेस्ट उपहार गृह चलाने वाले ठेकेदार को पहले प्रति कर्मचारी के हिसाब से सब्सिडी दी जाती थी, जिसे बेस्ट प्रशासन ने अब बंद कर दिया है, जिसका खामियाजा बेस्ट कर्मचारी भुगत रहे हैं। उपहार गृह बंद होने के कारण बेस्ट उपक्रम को भी उससे मिलने वाली आय बंद हो चुकी है। शिवड़ी बस टर्मिनस पर काम करनेवाले बेस्ट के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले डेढ़ सालों से बस टर्मिनस का उपहार गृह बंद है, जिसके कारण सभी कर्मचारियों को बाहर जाकर चाय-नाश्ता करना पड़ता है, जिसकी वजह से जेब पर ज्यादा बोझ पड़ता है। बेस्ट उपक्रम का महाव्यवस्थापक पद बहुत समय से खाली पड़ा था और पिछले हफ्ते ही राज्य सरकार ने पहली बार किसी महिला अधिकारी की बेस्ट के महाव्यवस्थापक पद पर पूर्णकालिक पद के लिए नियुक्ति की है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं पर नई महाव्यवस्थापक जरूर कोई सकारात्मक कदम उठाएंगी।

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