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असामाजिक तत्वों का आश्रय बना भायंदर का अवैध पार्किंग अड्डा!.. निजी बसों के कारण लोगों की सुरक्षा को खतरा

सुरेश गोलानी / मुंबई

विशाल झुग्गी बस्तियों, रिहायशी इमारतों और व्यावसायिक आस्थापनाओं (वर्कप्लेस) के पास भायंदर-पश्चिम स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम से सटी सड़क, प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के कारण फिर से अवैध पार्किंग स्थल में तब्दील हो चुका है, जहां मौजूद दर्जनो बसें असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित आश्रय शरणस्थली बन गई हैं। स्थानीय नागरिक खासकर पास की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चे, जो यहां खेलने आते हैं और सड़क से गुजरने वाली महिलाएं इन बसों की उपस्थिति के कारण खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। रात के समय तो यह सड़क और भी सुनसान, वीरान एवं डरावनी लगती है। ऐसे में प्रशासन पर बस मालिकों और ड्राइवरों से हफ्तावसूली का आरोप लगाते हुए स्थानीय नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों से इस अवैध पार्किंग स्थल से हमेशा के लिए छुटकारा दिलाने की मांग की है।
कहते हैं कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है, लेकिन लगता है मीरा-भायंदर मनपा और पुलिस प्रशासन लगभग पांच वर्ष पहले भायंदर की वो भयावह घटना को भूल चुके हैं, जिसमें अवैध रूप से पार्क की गई निजी लग्जरी बस का इस्तेमाल एक चार वर्ष की मासूम बच्ची का अपहरण, यौन उत्पीड़न और जान से मारने की कोशिश के लिए हुआ था। हालांकि, बच्ची को तो बचा लिया गया और आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार भी कर लिया था। लेकिन दिसंबर, २०२० में हुई इस दिल दहलाने वाली घटना के बाद भायंदर-पश्चिम स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम से सटी सड़क पर अवैध रूप से खड़ी निजी लग्जरी बसों के खिलाफ लोगों में काफी रोष देखने को मिला था। घटना के बाद कुछ महीनों तक मनपा ने बसों की अवैध पार्विंâग पर रोक लगा दी और पुलिस ने नियमित गश्त के माध्यम से सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए।
पहले भी हो चुका है बच्ची का शोषण
दिसंबर २०२० में शाम के समय बच्ची अपने दोस्तों के साथ खड़ी बस में खेल रही थी। थोड़ी देर बाद अन्य सभी बच्चे बस से उतरकर अपने घर चले गए, लेकिन बच्ची रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर लिया, जिसने बस के अंदर लड़की का यौन उत्पीड़न करने और उसका गला घोंटने का प्रयास करने की बात कबूल की। उसने बेहोश लड़की को एक बोरे में डाला और उसे वसई के वालिव इलाके में एक सुनसान जगह पर फेंक दिया। पुलिस ने बच्ची को खोज निकाला और उसे उसके परिवार के हवाले कर दिया।

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