मुख्यपृष्ठग्लैमर बिदाई मेरे दिल के बेहद करीब है- बह्निशिखा दास

 बिदाई मेरे दिल के बेहद करीब है- बह्निशिखा दास

हिमांशु राज

18 साल पहले एक कहानी आई थी, जिसने टेलीविजन पर परिवार की परिभाषा को ही बदल दिया। ‘सपना बाबुल का… बिदाई’ न केवल एक शो था, बल्कि वह दिलों में गूंजने वाली एक मर्मस्पर्शी दास्तां थी। बह्निशिखा दास, जिन्होंने इस कहानी को शब्दों में पिरोने में अपना अमूल्य योगदान दिया, आज उस दौर को याद कर भावुक हो उठती हैं।उनके अनुसार, उस समय कहानी सिर्फ संवादों और घटनाओं का समूह नहीं थी, बल्कि हर पल एक सच्चे परिवार की झलक थी, जिसमें बहनें, उनके दर्द, खुशियाँ, और रिश्तों की गहराई का बयान था। “जब मैं उस कहानी को लिखती थी, तो हर पात्र की अपनी एक धड़कन महसूस होती थी,” बह्निशिखा बताती हैं।राजन शाही के निर्देशन में बना यह शो अपनी सहजता और भावनात्मक सच्चाई के लिए जाना गया। बह्निशिखा कहती हैं, “राजन जी की सोच इतनी स्पष्ट थी कि हर दृश्य में दिल की आवाज सुनाई देती थी। उनके प्रेरणा देने वाले शब्दों ने मेरी लेखनी में जान डाल दी। “शो की सफलता का राज सिर्फ कहानी की मजबूती में नहीं, बल्कि उन छुपे हुए जज्बातों में था, जो हर घर के दर्शकों के दिल को छू गए। बह्निशिखा दास के लिए यह सफर व्यक्तिगत और रचनात्मक तौर पर अविस्मरणीय रहा। “यह मेरे लिए सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि एक जीवन का अनुभव था जिसने मुझे सिखाया कि कहानियाँ दिलों को जोड़ने और जीवन को बेहतर बनाने की ताकत रखती हैं।”आज भी जब बिदाई के उन बोल और कहानियाँ गूंजती हैं, तो एक पुरानी याद दिलाती हैं कि कितनी खूबसूरती से एक कहानी ने हमारी सांस्कृतिक और पारिवारिक सोच को संवारा। बह्निशिखा के शब्दों में यह शो हमेशा उनके दिल का वो हिस्सा रहेगा, जिसे वे गर्व और प्यार के साथ याद करती हैं।

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