राजन पारकर / मुंबई
अगर महाराष्ट्र की राजनीति समझनी हो, तो किसी मोटी किताब की जरूरत नहीं, महायुति के अंदर मचा घमासान ही काफी है। चांदा से लेकर बाद्ये तक नेता एक-दूसरे पर ऐसे टूट पड़े हैं, जैसे एक ही कटोरी खीर के लिए तीन बिल्लियां झगड़ रही हों। इसी राजनीतिक सर्कस के स्टेज पर उतरे क्रीड़ा मंत्री माणिकराव कोकाटे ने माइक मिलते ही बीजेपी पर ऐसी बोतल फोड़ी कि आवाज सीधे दिल्ली तक गूंजी।
‘भाजपा अब पूरी बोतल में बंद। इधर फोड़, उधर फोड़, इनका पूरा करियर ही फोड़ा-फोड़ी का!’ कोकाटे का बयान जितना जहरीला था, उतना ही मनोरंजक भी। उन्होंने खुले मंच से घोषणा की ‘भाजपा तो अब पूरी बाटली बन चुकी है। फोड़ा-फोड़ी यही रोज का धंधा है। इनका पूरा जीवन फोड़ा-फोड़ी में ही बीत जाता है!’ यह बयान राजनीति से ज्यादा ‘घर-फोड़ स्पेशलिस्ट प्राइवेट लिमिटेड’ का विज्ञापन लग रहा था। नगरपालिका चुनाव बना ‘डब्ल्यूडब्ल्यूई’ का रिंग। महायुति के तीनों साथी विधानसभा में भाई-भाई और नगरपालिका चुनाव में एक-दूसरे की सियासी धोती खींचने में माहिर पहलवान।
भाजपा बनाम दादा गुट और दादा गुट बनाम शिंदे गुट! मित्रता पल में दुश्मनी और दुश्मन तमाशा देखने बैठे, ऐसी महान राजनीतिक पटकथा किसी ओटीटी पर भी नहीं मिलेगी। ‘सिन्नर बढ़िया है। बाकी शहर ऐसे कि कौए और गाय भी मास्क पहनकर निकलें। कोकाटे ने पूरे राज्य में घूमकर विचार बनाया, ‘कई शहर इतने गंदे हैं कि स्वच्छता अभियान भी रो पड़े। इनके मुकाबले सिन्नर तो मॉडल टाउन है।’ फिर उसी मंच से घोषणा, ‘सिन्नर के खेल परिसर के लिए १०० करोड़ मेरे पास तैयार हैं। मैं दादा का पट्ठा हूं। मेरी बात पत्थर की लकीर है!’ मानो विकास योजना नहीं, बल्कि वादों की नोटरीकृत कॉपी जनता को बांटी जा रही हो। ‘फोड़ा-फोड़ी करने से भाजपा को फायदा? अरे, रत्तीभर भी नहीं!’ कोकाटे ने भाजपा पर एक के बाद एक वार किए, पहले मेरे घर में भाई को उकसाकर फोड़ा-फोड़ी की। अब वाजे साहब के घर में हेमंत वाजे भेजकर फोड़ा-फोड़ी!’ जनता सोच में पड़ गई, यह राजनीति है या ‘होम-डिलिवरी घरफोड़ सेवा’?
‘लाडली बहन योजना’: योजना एक, लेकिन पिता अनेक। कोकाटे ने दावा किया, ‘लाडली बहन योजना सिर्फ शिंदे जी की नहीं। इसमें फडणवीस और अजीत दादा, दोनों ने मजबूत समर्थन दिया था।’ क्रेडिट की राजनीति में योजना तो एक, लेकिन पिता चार निकल आए। उदय पर बिना नाम लिए तीर चलाते हुए कोकाटे बोले, ‘जाति-पांति में आग लगाकर घर तोड़ने वाला धंधेवाला कौन है, इसका डीएनए सबको पता है।’ बिना नाम लिए सीधा दिल में घुसने वाला तीर! वाजे और कोकाटे ‘डील’ की अफवाह पर विराम।
