-महासभा की रिकॉर्डिंग पर रोक का कोई दस्तावेज नहीं, आरटीआई से खुलासा
कैमरे बंद कराने की जिद या जवाबदेही से बचने की कोशिश?
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका की महासभा और समितियों की बैठकों में आम नागरिकों, पत्रकारों और समाजसेवियों द्वारा की जाने वाली वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर चल रहा विवाद अब पूरी तरह साफ हो गया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले आधिकारिक दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि मनपा की महासभा और अन्य बैठकों वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी या मोबाइल से चित्रीकरण करने पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई भी कानून, नियम, शासकीय आदेश (जीआर) या मनपा का कोई अधिकृत प्रस्ताव अस्तित्व में ही नहीं है।
इस मामले में एड. कृष्णा गुप्ता द्वारा आरटीआई के तहत पूछे गए सवालों के जवाब में मनपा के जनसूचना अधिकारी व नगरसचिव विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने लिखित रूप से जानकारी शून्य होने की बात स्वीकार की है। मनपा ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई नागरिक महासभा की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग करता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने या किसी भी प्रकार की दंडात्मक कानूनी कार्रवाई करने का कोई प्रावधान उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही, पूर्व में ऐसी किसी वजह से किसी व्यक्ति पर कार्रवाई किए जाने का कोई रिकॉर्ड भी मनपा के पास नहीं है। हाल के दिनों में मनपा प्रशासन और सत्ताधारी भाजपा पर आरोप लगते रहे हैं कि वे महासभा की गड़बड़ियों, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जनहित से जुड़े मुद्दों पर होने वाली बहस को जनता के सामने आने से रोकना चाहते हैं। शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब देश सर्वोच्च संस्था-संसद और राज्य विधानसभा की हर एक कार्यवाही का लाइव प्रसारण सीधे टीवी और इंटरनेट पर जनता के सामने किया जाता है, तो मीरा-भायंदर मनपा को जनता के वैâमरों से इतना डर क्यों है? इसके अलावा देश की कई बड़ी महानगरपालिकाओं में लाइव वेबकास्टिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो मीरा-भायंदर मनपा में डिजिटल फुटप्रिंट मिटाने और सबूतों को छुपाने की कोशिश क्यों?
आरटीआई ने खोली पोल
एड. कृष्णा गुप्ता की आरटीआई के जवाब में मनपा के संबंधित विभागों ने बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने वाले कानून, जीआर या अधिकृत प्रस्ताव का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी। इससे रिकॉर्डिंग रोकने की कार्रवाई के आधार पर सवाल खड़े हो गए हैं।
